ट्रामल मशीनों को लेकर चेयरमैन की आप को चुनौती, कहा- इससे सस्ता काम करवा कर दिखाइए

भलस्वा लैंडफिल पर ट्रामल मशीनों के संचालन में आम आदमी पार्टी (आप) के आरोपों पर उत्तरी निगम के स्थायी समिति अध्यक्ष जोगीराम जैन ने चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि इससे सस्ती दरों पर कोई काम यह काम करके दिखाए तो वह मान जाएंगे।

Prateek KumarTue, 27 Jul 2021 08:41 PM (IST)
भलस्वा लैंडफिल कूड़े का पहाड़ आने वाले वर्षों में खत्म होने जा रहा है।

नई दिल्ली, निहाल सिंह। भलस्वा लैंडफिल पर ट्रामल मशीनों के संचालन में आम आदमी पार्टी (आप) के आरोपों पर उत्तरी निगम के स्थायी समिति अध्यक्ष जोगीराम जैन ने चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि इससे सस्ती दरों पर कोई काम यह काम करके दिखाए तो वह मान जाएंगे। भारत ही नहीं विश्व में सबसे सस्ती दरों पर यह कार्य हो रहा है और आने वाले 20-22 माह में भलस्वा लैंडफिल पूरी तरह साफ हो जाएगी। आप द्वारा लगाए गए आरोप लोगों को भ्रमित करने के लिए हैं जबकि निगम के अधिकारियों की मेहनत से भलस्वा लैंडफिल जैसा कूड़े का पहाड़ आने वाले वर्षों में खत्म होने जा रहा है।

ट्रामल मशीनों के किराए पर आरोप-प्रत्यारोप

दरअसल, रविवार को आप के नेताओं ने प्रेसवार्ता में यह आरोप लगाया था भलस्वा लैंडफिल पर कूड़े के निस्तारण के लिए जो ट्रामल मशीनें लगाई जा रही है उनकी कीमत उतनी नहीं उससे ज्यादा तो किराया देने का प्रस्ताव पारित किया जा रहा है। इसको लेकर उत्तरी निगम की स्थायी समिति की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसमें आप पार्षद विक्की गुप्ता, अजय शर्मा और राजीव ने प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों को दोहराया। चेयरमैन जोगीराम जैन ने इस पर पर्यावरण प्रबंधंन सेवाएं विभाग के निदेशक प्रदीप बंसल को स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए।

स्पष्टीकरण में बताया नहीं लिया जा रहा किराया

बंसल ने स्थायी समिति को बताया कि ट्रामल मशीनों का कोई किराया नहीं लिया जा रहा है। अब जो मशीनें लगाई जा रही है उन्हें निस्तारित किए गए कूड़े के 306 रुपये टन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। वर्तमान में भलस्वा लैंडफिल पर 25 मशीनें लगी हैं। 79 मशीनें यहां लगाने की योजना है। एक मशीन को कम से कम छह हजार टन कूड़े का प्रतिमाह निस्तारण करना होगा। इससे कम निस्तारण करने पर 60 हजार रुपये का जुर्माने का प्रावधान होगा।

बंसल ने भी बताया कि इस कार्य में 31 कंपनियों को यह ट्रामल लगाने की अनुमति दी गई है। इसमें ट्रामल मशीनों के साथ ही जेसीबी, पोकलैंड, टिप्पर के साथ वहां लगाने वाले मानव संसाधन और इसके ऊपर ईधन का आने वाला खर्चा भी कंपनियां उठाएगी। उल्लेखनीय है कि एनजीटी के आदेशों पर लैंडफिल साइटों पर पड़े कचरे को इंदौर माडल के तहत निस्तारित किया जा रहा है। ट्रामल मशीनों के माध्यम से लैंडफिल के कूड़े से मिट्टी अलग की जाती है वहीं, प्लास्टिक व मलबे को अलग-अलग किया जाता है। इससे यहां पर अभी तक 15 मीटर तक कूड़े के टीलों को खत्म कर दिया गया है।

आप ने किया प्रदर्शन

आम आदमी पार्टी ने लैंडफिल पर ट्रामल मशीनों पर कथित भ्रष्टाचार को लेकर सिविक सेंटर में प्रदर्शन किया। साथ ही इसे एक भ्रष्टाचार का जरिया बताया। नेता प्रतिपक्ष विकास गोयल ने कहा कि ट्रामल मशीनों का जितना किराया दिया जा रहा है उससे कम तो मशीनों की कीमत है।

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