संयुक्त किसान मोर्चा का दावा- MSP कानून के लिए बनाई जाने वाली समिति के लिए केंद्र ने मांगे पांच नाम

Kisan Andolan केंद्र सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा से एमएसपी गारंटी कानून के लिए बनाए जाने वाली समिति के लिए पांच लोगों के नाम मांगे हैं लेकिन मोर्चा ने अभी पांच नाम तय नहीं किए हैं। मोर्चा चार दिसंबर को होने वाली बैठक में कोई फैसला लेगा।

Mangal YadavTue, 30 Nov 2021 10:44 PM (IST)
केंद्र सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा से मांगे पांच नाम

सोनीपत [नंद किशोर भारद्वाज]। केंद्र सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा से एमएसपी गारंटी कानून के लिए बनाए जाने वाली समिति के लिए पांच लोगों के नाम मांगे हैं लेकिन मोर्चा ने अभी पांच नाम तय नहीं किए हैं। मोर्चा चार दिसंबर को होने वाली बैठक में इन नामों के साथ ही आंदोलन को दिशा देने संबंधी अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला लेगा। उधर, संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान जारी कर कहा है कि भारत सरकार की ओर से पंजाब किसान संगठन के एक नेता को टेलीफोन कॉल आया था, जिसमें सरकार चाहती थी कि एसकेएम की ओर से एक समिति के लिए पांच नाम सुझाए जाएं। हालांकि, हमें इस बारे में कोई लिखित सूचना नहीं मिली है और न ही अब तक इस बारे में कोई विवरण उपलब्ध है कि यह समिति किस बारे में है।

दूसरी ओर मोर्चा की एक आपातकालीन बैठक बुधवार को दोपहर बाद कुंडली बार्डर पर होगी। इसमें आंदोलन को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। मंगलवार को मोर्चा ने जारी बयान में साफ किया कि जब तक किसानों की सभी मांगें पूरी नहीं होंगी वे यहां से नहीं जाएंगे। उधर पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने लगातार दूसरे दिन बैठक की और कहा कि वे अधूरी मांगों के साथ वापस नहीं जाएंगे।

संयुक्त किसान नेता डा. दर्शनपाल ने कहा कि केंद्र ने मंगलवार को एसकेएम से उस समिति के लिए पांच नाम मांगे हैं जो फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर विचार करेगी लेकिन हमने अभी नामों पर फैसला नहीं किया है। हम चार दिसंबर की बैठक में ये नाम तय करेंगे। दूसरी ओर आंदोलनस्थल से घर वापसी की तैयारी की खबरों को पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने बैठक के बाद सिरे से नकार दिया है।

लगातार दूसरे दिन कुंडली बार्डर पर मंगलवार को बैठक कर जत्थेबंदियों के नेताओं ने कहा कि वे घर तो जाना चाहते हैं, लेकिन अधूरी मांगों के साथ नहीं। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की सहमति के बिना यहां से कोई नहीं जाएगा। यदि मांगें पूरी नहीं की गई तो वे यहीं डटे रहेंगे। बुधवार को कुंडली बार्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के सभी 41 सदस्य जुटेंगे और बैठक कर आगामी रणनीति बनाएंगे।

सोमवार को जत्थेबंदियों की बैठक के बाद से यह कयास लगाए जाने लगे थे कि संसद में कृषि कानून वापसी बिल पास हो गया है तो पंजाब की जत्थेबंदियां घर जाने की तैयारी में हैं। ऐसे में सभी 32 जत्थेबंदियों ने लगातार दूसरे दिन मंगलवार अचानक बैठक बुलाई।

बैठक में के बाद जत्थेबंदियों के प्रमुख अवतार सिंह, मंजीत राय ने साफ किया कि वे मांगें पूरी होने से पहले वे कहीं नहीं जा रहे। सरकार को एमएसपी गारंटी कानून, किसानों पर बनाए मुकद्दमे वापसी, मुआवजा, बिजली बिल कानून समेत सभी छह मांगों को मानना होगा।

किसान नेता अवतार सिंह ने कहा कि किसानों पर जो केस दर्ज किए हुए हैं, उन पर दर्ज मुकदमे भी वापस होने चाहिए। दूसरी ओर संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य डा. दर्शन पाल ने मंगलवार को कहा कि पूर्व घोषणा अनुसार मोर्चा के सभी घटक संगठनों की बैठक चार दिसंबर को भी होगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उठाए गए विभिन्न बिंदुओं और भविष्य में लिए जाने वाले फैसलों पर चर्चा होगी।

कुंडली बार्डर घर वापसी को सामान बांधने लगे किसान

बार्डर पर अब कई किसान घर जाने के लिए अपना सामान बांधने लगे हैं। मंगलवार सुबह कई किसानों अपना सामान पैक कर ट्रक में रख लिया। किसान तेजेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं, बाकी मांगें भी पूरी करने का आश्वासन दिया है। अब उनके घर में बेटी की शादी है, इसलिए अब अपने घर लौटने की तैयारी है।

निहंग बाबा बलविंद्र ने साथियों पर लगाए आरोप

कुंडली बार्डर पर बेअदबी का आरोप लगाकर युवक की नृशंस हत्या के मामले के बाद विवादों में आए निहंग जत्थेदारों ने एक-दूसरे पर ही सवाल उठाए हैं। निहंग जत्थेदार बाबा बलविंद्र सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि युवक की हत्या के मामले में उनके चार निहंग साथी जेल में हैं।

उस समय निहंग जत्थेदार बाबा राजराज सिंह और बाबा कुलविंद्र सिंह समेत कई लोगों ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन अब कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा। बाबा बलविंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पास फोन आ रहे हैं कि लाखों रुपये उनके पास पहुंचाए गए हैं, वे क्या कर रहे हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास कोई पैसा नहीं आया है, जिन लोगों के पास पैसा आया है, वे जाने। आंदोलन खत्म करने को लेकर उन्होंने कहा कि वे सभी संगतों से बातचीत कर रहे हैं। सभी की सहमति से ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

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