अरविंद केजरीवाल ने एलजी के पास फिर भेजी घर-घर राशन योजना की फाइल, पक्ष में दिए 10 तर्क

Ghar Ghar Ration Yojna बृहस्पतिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घर घर राशन योजना (Ghar Ghar Ration Yojna ) वाली फ़ाइल फिर से उपराज्यपाल अनिल बैजल के पास मंजूरी के लिए भेजी है। इस योजना को लागू किए जाने को लेकर अरविंद केजरीवाल ने 10 तर्क दिए हैं।

Jp YadavThu, 17 Jun 2021 02:43 PM (IST)
अरविंद केजरीवाल ने एलजी के पास भेजी 'घर-घर राशन' योजना की फाइल, पक्ष में दिए 10 तर्क

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। देश की राजधानी दिल्ली में लागू की जाने वाली 'घर-घर राशन योजना' पर एक बार फिर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच राजनीतिक संग्राम छिड़ना तय हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा योजना पर रोक लगाए जाने के बाद बृहस्पतिवार को एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 'घर घर राशन योजना' (Ghar Ghar Ration Yojna) वाली फ़ाइल उपराज्यपाल अनिल बैजल के पास मंजूरी के लिए भेजी है।  इस दौरान इस योजना को लागू किए जाने को लेकर अरविंद केजरीवाल ने 10 तर्क दिए हैं।

1. हमारी योजना क़ानून के मुताबिक़।

2. ये योजना केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए लागू की गई।

3. करोना काल में इस योजना को रोकना गलत।

4. पिछले तीन साल में चार बार LG साहब को घर घर राशन योजना की कैबिनेट निर्णय की जानकारी दी गई, लेकिन LG साहिब ने कभी इसका विरोध नहीं किया।

5. फ़रवरी महीने में इस योजना को लागू करने के नोटिफ़िकेशन का भी LG साहब ने विरोध नहीं किया।

6. LG साहब को ये जानकारी थी कि स्कीम को मंज़ूरी मिल गई है और लागू करने के कगार पर थी।

7. केंद्र सरकार ने जितनी आपत्ति लगाई, वह सारी ठीक कर दी गई।

8. पांच सुनवाई के बावजूद दिल्ली हाई कोर्ट ने इस केस में कोई स्टे नहीं लगाया।

9. कोर्ट केस के दौरान केंद्र ने कभी कोई मंजूरी के बारे में नहीं बताया।

10. फिर इस योजना को क्यों रोका जा रहा है?

बता दें कि कुछ आपत्तियों के चलते केंद्र सरकार की ओर से 25 मार्च को यह योजना रोक दी गई थी। इसके बाद इसका नाम घर-घर राशन कर दिया गया था। केंद्र सरकार के सुझावों के बाद 24 मई 2021 को दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल को योजना लागू करने के लिए फाइल भेजी, लेकिन एलजी ने इस फाइल को वापस कर दिया और कहा कि इस योजना को दिल्ली में लागू नहीं किया जा सकता।

पूर्व में कहा गया था कि इस योजना के लिए दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से अनुमति नहीं ली थी। दिल्ली सरकार ने इस निर्णय को राजनीति से प्रेरित बताया है।  

 

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