Exclusive Interview में बोले अरविंद केजरीवाल, फर्जी है पीएम मोदी का राष्ट्रवाद

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव-2019 के मद्देनजर दिल्ली पर पूरे देश की नजर है। वजह साफ है, यहां के मुख्यमंत्री अर¨वद केजरीवाल, जो भ्रष्टाचार के विरोध और लोकपाल की मांग को लेकर चलाए गए समाजसेवी अन्ना हजारे के आंदोलन से उभरे। आप के नाम से अपनी (आम आदमी पार्टी) पार्टी बनाई और पहले ही विधानसभा चुनाव में सत्ता पर कब्जा कर लिया। बाद में 49 दिन सरकार चलाकर सत्ता छोड़ दी और दोबारा हुए चुनाव में 70 में से 67 सीटें हासिल कर दिल्ली ही नहीं, देश की राजनीति में छा गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धुर विरोधी और उनके राष्ट्रवाद को धोखा करार देने वाले केजरीवाल ने मौजूदा लोकसभा चुनाव में उन्हें रोकने के लिए कांग्रेस से गठबंधन की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब आप अकेले चुनाव लड़ रही है। उसके नेता दिल्ली में हो रहे त्रिकोणीय मुकाबले में सातों सीटों पर अपनी जीत का दावा भी ठोक रहे हैं। क्या हैं केजरीवाल और उनकी पार्टी के मुद्दे, क्या है रणनीति, क्या हैं भविष्य की योजनाएं, इन विषयों पर उनसे दैनिक जगरण के सौरभ श्रीवास्तववीके शुक्ला ने विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश..
 

1. दिल्ली का सियासी मिजाज क्या कहता है?
-कुछ दिनों से आप के पक्ष में भारी लहर बनती जा रही है। पिछले एक-दो महीने से हम देख रहे थे कि भाजपा और आप में कड़ी टक्कर है, लेकिन अब वह माहौल दिखाई पड़ रहा है, जो हमने दिल्ली विधानसभा चुनाव में 67 सीटें जीतने के समय देखा था। हम दिल्ली के लोगों को यह संदेश देने में सफल हो गए हैं कि सातों सीटें हमें दोगे तो हम दिल्ली में और बेहतर तरीके से काम कर पाएंगे। मोदी जी दिल्ली के काम में अड़ंगा नहीं लगा पाएंगे। दिल्ली में आज भाजपा के सातों सांसदों से लोग नाराज हैं। हर्षवर्धन को लोगों ने कई सोसायटियों में अंदर नहीं जाने दिया। प्रवेश वर्मा को गांवों में विरोध ङोलना पड़ रहा है और रमेश बिधूड़ी की गुंडे की छवि लोगों को भली भांति पता है। मनोज तिवारी की बुरी तरह हार हो रही है। मीनाक्षी लेखी को उनके कार्यकर्ता ही पसंद नहीं कर रहे हैं। भाजपा दो सीटों पर बाहरी प्रत्याशी लेकर आई है। गौतम गंभीर रोज नए विवादों में फंस रहे हैं और हंसराज हंस अब तक अपना चुनावी माहौल नहीं बना पाए हैं।

2. इस बार लोकसभा चुनाव में दिल्ली के मुद्दे क्या हैं?
-दिल्ली केंद्र को डेढ़ लाख करोड़ टैक्स देती है, बदले में उसे पूर्ण राज्य न होने की दलील देकर सिर्फ 325 करोड़ मिलते हैं, जबकि उसे कुल टैक्स का 43 फीसद मिलना चाहिए। यदि वह मिलता है तो दिल्ली के पास 60 हजार करोड़ रुपये आने चाहिए। इतनी बड़ी राशि यदि दिल्ली को मिल जाएगी तो पूरी दिल्ली बदल जाएगी। दूसरा दिल्ली में कानून-व्यवस्था की समस्या है। इसे रेप कैपिटल के नाम से जाना जाता है। पुलिस केंद्र के पास होने के कारण कानून व्यवस्था प्रधानमंत्री के पास है, लेकिन उन्हें इतना समय नहीं है कि वह दिल्ली के बारे में सोचें। यदि कानून व्यवस्था हमारे पास आ जाएगी तो हम शिक्षा और स्वास्थ्य की तरह इस क्षेत्र में भी सुधार कर देंगे। हम चाहते हैं कि दिल्ली की सुविधाओं का दिल्ली के लोगों को अधिकतम लाभ मिले। ऐसा क्यों है कि बाहर का कोई व्यक्ति 500 रुपये किराया खर्च कर दिल्ली आए और चार लाख का मुफ्त इलाज कराकर वापस लौट जाए? हम उसे इलाज के लिए नहीं मना कर रहे हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि दिल्ली के लोगों को पूरी सुविधाएं मिलें। बाहर के लोगों को इलाज मिले लेकिन मुफ्त में दवा और आपरेशन आदि न हो। हालांकि यह मुद्दा अभी अदालत में है। आज स्कूलों में स्थिति यह है कि दिल्ली के बच्चों को 12वीं कक्षा में 92 फीसद रिजल्ट आने पर भी विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलता। हम चाहते हैं कि दिल्ली सरकार के फंड से चलने वाले कॉलेजों में दिल्ली के बच्चों को दाखिला में 85 फीसद आरक्षण मिले। इसी तरह दिल्ली के युवकों को रोजगार भी नहीं मिल पाता। दिल्ली सरकार की नौकरियां दूसरे राज्यों के युवक ले जाते हैं। मैं चाहता हूं कि 95 फीसद नौकरियां दिल्ली के लोगों को मिलें। आज दिल्ली गंदा शहर है। नगर निगम के पास इसे साफ करने की जिम्मेदारी है, लेकिन निगम केंद्र सरकार के पास है। हम चाहते हैं कि दिल्ली सुंदर शहर बने। मैं केंद्र सरकार नहीं, दिल्ली सरकार चला रहा हूं, इसलिए दिल्ली के लोगों को अधिकाधिक सुविधा मिले, ये मेरी जिम्मेदारी है। मैं चाहता हूं कि जिनके टैक्स के पैसे से मेरी सरकार चलती है, उन्हें मैं सभी सुविधाएं दूं।
 
3. पूर्ण राज्य का मुद्दा क्या है?
-दिल्ली में हम कोई भी काम करना चाहते हैं तो केंद्र सरकार नहीं करने देती। हम बच्चों के लिए कॉलेज खोलना चाहते हैं, लेकिन नहीं खोल पा रहे। अस्पताल बनाना चाहते हैं, लेकिन नहीं बना पा रहे। जमीन केंद्र सरकार के अधीन है। हम लोगों के लिए मकान बनाना चाहें तो दिल्ली विकास प्राधिकरण हमारे पास नहीं है। केंद्र सरकार कुछ भी काम नहीं होने दे रही है। पूर्ण राज्य बनने पर हम दिल्ली में इतने कॉलेज बना देंगे कि 12वीं कक्षा में 60 फीसद अंक पाने वाले छात्र को भी दाखिला मिल पाएगा। अधिकारियों की नियुक्ति व तबादले का अधिकार भी हमारे पास नहीं है। पुलिस केंद्र के अधीन होने के कारण हमारी सुनती नहीं है।

4.आप दावा कर रहे हैं कि सातों सीट जीतने पर आप दिल्ली को पूर्ण राज्य बनवा देंगे, सीलिंग रुकवा देंगे। ऐसा कैसे संभव हो सकेगा?
-मेरा मानना है कि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा। ऐसे में सरकार बनाने में मोदी विरोधी दल के लिए सात सांसद बहुत मायने रखेंगे। हम दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की शर्त पर ही समर्थन देंगे। दिल्ली में जिनकी दुकानें सील की जा रही हैं, वे व्यापारी हैं, चोर नहीं। केंद्र सरकार उन्हें चोर की तरह देख रही है और कार्रवाई कर रही है, जबकि उन्होंने हमेशा भाजपा का ही समर्थन किया है। आप दिल्ली की दुकानों को सील कर देंगे तो रोजगार कहां से आएगा। यह मौजूदा और पूर्व की केंद्र सरकारों की कमी है कि उन्होंने नियोजित तरीके से दिल्ली को नहीं बसाया। बाजार बनाए जाते, कॉलोनियों को नियोजित तरीके से बसाया जाता तो आज कच्ची कॉलोनियां क्यों बसतीं? आज हम एक तरफ व्यापारियों को सीलिंग से बचाने के लिए कोर्ट में जाकर उनके समर्थन में लड़ाई लड़ रहे हैं, इसी तरह दूसरी ओर कच्ची कॉलोनियों में विकास कार्य करा रहे हैं। अगले तीन साल में सभी कच्ची कॉलोनियों में सड़कें, गलियां और जहां भी जगह मिलेगी पार्क बनवा देंगे। भाजपा इन कॉलोनियों को तोड़कर बिल्डरों को देना चाहती है, जो बड़ा घोटाला है। हम अपने सांसदों को साथ लेकर सड़क से लेकर संसद तक सीलिंग के खिलाफ लड़ेंगे। जरूरत पड़ेगी तो संसद ठप कर देंगे और दिल्ली के लोगों को उनका हक दिलाएंगे।

5. आप भाजपा के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाते रहे हैं, ऐसा क्यों है?
मोदी जी आज राष्ट्रवाद पर चुनाव लड़ रहे हैं। मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि उनका राष्ट्रवाद फर्जी है। मेरा सवाल है कि मोदी जी का पाकिस्तान के साथ क्या संबंध है? जिस पाकिस्तान ने चुनाव से दो महीने पहले पुलवामा में हमला कराया और मोदी जी के अनुसार हमारी सेना ने जिसके इलाके में अंदर घुसकर बड़ी सैन्य कार्रवाई की, उसी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बार-बार कह रहे हैं कि मोदी जी फिर से प्रधानमंत्री बनें। वास्तव में मोदी का राष्ट्रवाद धोखा है। आखिर मोदी जी और पाकिस्तान के बीच में चल क्या रहा है, ये कैसा राष्ट्रवाद है? मोदी जी इसी मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्हें डर है कि केजरीवाल यदि दिल्ली के विकास को लेकर इसी तरह काम करता रहा तो उनके लिए कुछ नहीं बचेगा। जनता सब समझ जाएगी।

 

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