Kisan Andolan: क्या किसान आंदोलन की वजह से दिल्ली में देरी से पहुंच रहे हैं ऑक्सीजन सिलेंडर

किसान दिल्ली-यूपी और हरियाणा के बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

Oxygen Shortage in Delhi गाजीपुर सिंघु और टीकरी पर बैठे किसानों पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि इनके धरनों की वजह से ऑक्सीजन टैंकरों देरी से दिल्ली पहुंच रहे हैं। वहीं रास्ता रोकने के आरोपों को लेकर किसान संगठन साफ इनकार कर रहे हैं।

Jp YadavSat, 24 Apr 2021 01:21 PM (IST)

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली-यूपी और हरियाणा के बॉर्डर पर किसानों का धरना प्रदर्शन जारी है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों बहुत तेजी से इजाफा हो रहा है। इस बीच बाहरी दिल्ली के रोहिणी स्थित जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 25 मरीजों की मौत हो गई। वहीं, गाजीपुर, सिंघु और टीकरी पर बैठे किसानों पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि इनके धरनों की वजह से ऑक्सीजन टैंकरों देरी से दिल्ली पहुंच रहे हैं। वहीं, रास्ता रोकने के आरोपों को लेकर किसान संगठन साफ इनकार कर रहे हैं। किसान संगठनों का साफतौर पर कहना है कि किसी भी ऑक्सीजन टैंकरों को जाने से नहीं रोका जा रहा है। उलटा किसान तो पहले ही कह चुके हैं कि वे एंबुलेंस और ऑक्सीजन सिलेंडर को खुद रास्ता बनाकर दे रहे हैं। उधर, भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक की मानें तो दिल्ली पुलिस जानबूझकर ऑक्सीजन टैंकरों को गलत दिशा में भेज रही है। हमने कोई भी हाईवे या फिर रास्ता नहीं रोका है। जहां भी बैरिकेडिंग है, वह दिल्ली पुलिस ने की है।

किसानों ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीमाओं पर बैठे किसानों का कहना है कि दिल्ली पुलिस ही टैंकरों को गलत दिशा में भेज रही हैं। हमारे यहां से जो भी ऑक्सीजन टैंकर जा रहे हैं, उन्हें कोई दिक्कत नहीं आ रही है। हम तो हर सहयोग करने को तैयार हैं। हम तो जब से धरना प्रदर्शन पर बैठे हैं मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं।

टैंकर-ट्रक फंस रहे गलियों में

वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि प्रदर्शनकारियों के रास्ता रोकने के कारण ऑक्सीजन टैंकर को अपना रास्ता बदलना पड़ रहा है। इसके चलते टैंकर-ट्रक गांव की संकरी गलियां में फंस रहे हैं या फिर उनकी गति बेहद कम हो जाती है। इसके अलावा, ऑक्सीजन टैंकरों को कई किलोमीटर दूर तक घूमकर अस्पताल में जाना पड़ रहा है, जिसके कारण लोगों को परेशानी हो रही है।

उधर, संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं की मानें तो आंदोलन के पहले दिन से ही आपात सेवाओं के लिए एक तरफ का रास्ता खुला छोड़ा हुआ है। इसमें कोई बदलाव भी नहीं किया गया है। ऐसे में यह आरोप गलत हैं। पिछले साढ़े चार महीने से अब तक एक भी एंबुलेंस या जरूरी वस्तु सेवा को नहीं रोका गया है।

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प्रदर्शनकारियों का बदनाम किया जा रहा है

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि तीनों कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन के चलते किसानों को बदनाम किया जा रहा है। गलत बताया जा रहा है कि किसान प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम की हैं। यह तो केंद्र सरकार ने सड़कों पर बैरीकेडिंग और कीलें लगा रखी हैं। किसान मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और वे हर मानव के अधिकारों का समर्थन करते हैं।

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