भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को बदायूं जिले में मिला गुप्त काल के बाद का पुरातात्विक स्थल, टीम ने किया दौरा

पिछले महीने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के सहायक अभियंता संजीव सिंह इस गांव में अपनी नानी के यहां गए थे। वहां चारों ओर बिखरे हुए एक हिंदू मंदिर की मूर्तियों के दो सिर एक टूटा हुआ हाथ प्राचीन ईट और अवशेष देखकर हैरान रह गए।

Vinay Kumar TiwariMon, 27 Sep 2021 01:08 PM (IST)
एएसआइ ने कहा-गुप्त काल के बाद के हैं अवशेष, की जाएगी खोदाई

नई दिल्ली [वीके शुक्ला]। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक टीले पर गुप्त काल के बाद का पुरातात्विक स्थल खोज निकाला है। यह स्थल बदायूं जिले में गंगा नदी के पूर्वी तट पर स्थित गांव खेड़ा जलालपुर में है। इसे खोजने में दिल्ली नगर निगम के उन अभियंता संजीव सिंह ने एएसआइ की मदद की है, जिन्होंने दिल्ली में पिछले साल हुमायूं के मकबरा परिसर में मुगल शहजादे दाराशिकोह की संभावित कब्र को खोजने में मदद की थी। एएसआइ की टीम बदायूं के इस पुरातात्विक स्थल का दौरा कर चुकी है।

एएसआइ ने प्रथम दृष्टया इसे गुप्त काल के बाद के समय का पाया है, जिसे सातवीं-आठवीं शताब्दी का माना जा रहा है। एएसआइ की यहां खोदाई कराने की योजना है और इस स्थल को वह सूचीबद्ध भी करेगा। पिछले महीने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के सहायक अभियंता संजीव सिंह इस गांव में अपनी नानी के यहां गए थे। वहां गांव के लोगों ने उन्हें इस स्थल के बारे में जानकारी दी। वह इस स्थल पर गए। वहां चारों ओर बिखरे हुए एक हिंदू मंदिर की मूर्तियों के दो सिर, एक टूटा हुआ हाथ, प्राचीन ईट और अवशेष देखकर हैरान रह गए। सिंह ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के मेरठ सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद डीबी गणनायक को मामले की सूचना दी।

राजस्व रिकार्ड से निकाला जा रहा जमीन का ब्योरा

गणनायक का कहना है कि एएसआइ की टीम खेड़ा जलालपुर और अन्य गांवों का सर्वेक्षण करने गई थी। वहां जो पुरातात्विक अवशेष मिले हैं, वे गुप्त काल के बाद के हैं, जो आज से करीब 1300-1400 साल पुराने हैं। वहां काफी समृद्ध पुरातात्विक स्थल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि स्थल गांव के बीच में है और भूमि की स्थिति अज्ञात है। हम राजस्व रिकार्ड से जमीन के ब्योरे का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इस स्थल को सूचीबद्ध किया जाएगा।

पुरातात्विक दृष्टि से समृद्ध स्थान रहा है बदायूं

प्रसिद्ध पुरातत्वविद डा. बीआर मणि कहते हैं कि बदायूं पुरातात्विक दृष्टि से एक समृद्ध स्थान रहा है। यह महाभारत की द्रौपदी की जन्मस्थली प्राचीन पांचाल का हिस्सा था। दिल्ली सल्तनत के मामलुक वंश के शासन के दौरान बदायूं ने एक विशेष महत्व प्राप्त किया, क्योंकि यह सुल्तान इल्तुतमिश का सबसे पसंदीदा स्थान था। उन्होंने कहा कि खेड़ा जलालपुर पुरातात्विक स्थल सातवीं से दसवीं शताब्दी से और पहले का भी हो सकता है। जब तक स्थल पर खोदाई नहीं होती है, यह नहीं कह सकते कि जमीन के नीचे क्या है।

लोगों की आस्था का केंद्र है पुरातात्विक स्थल

हमारे बदायूं संवाददाता कमलेश शर्मा ने खेड़ा जलालपुर में जाकर ग्रामीणों से बात की तो पता चला कि यह पुरातात्विक स्थल उन लोगों की आस्था का केंद्र है। आइए जानते हैं कि किसने क्या कहा?

गांव के बाहर प्राचीन टीला है। यहां हर साल भैरो बाबा का हवन होता है। 18 सितंबर को हवन के बाद टेंट लगाने के लिए गड्ढा किया जा रहा था तब शिवलिंग निकले हैं। मटकी में राख और रेत मिली है। प्राचीन जगह है, इसे संरक्षित किया जाना चाहिए।-ध्यानपाल, प्रधान, खेड़ा जलालपुर

बचपन से ही इस टीले को देखते आ रहे हैं। वर्षो से गांव के बाहर टीले पर हर साल पूजा-अर्चना होती रही है। भैरो बाबा के प्रति गांव के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम पिछले दिनों यहां आई थी। जांच पड़ताल की बात बताई जा रही है। इस जगह को सुरक्षित किए जाने की जरूरत है।

-अरब सिंह, ग्रामीण जलालपुर

खेड़ा जलालपुर गांव में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम के आने की तो कोई जानकारी नहीं है, लेकिन गांव के कुछ लोगों के अवैध कब्जा करने की शिकायत मिली है। इसे देखते हुए थानाध्यक्ष को जांच के आदेश दिए हैं। कोई भी निर्माण किए जाने पर रोक लगा दी गई है। जांच में जो भी तथ्य आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

-पारसनाथ मौर्य, एसडीएम, दातागंज

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