अरावली वन क्षेत्र बना आकर्षण का केंद्र, कई दुलर्भ पक्षियों की प्रजातियों का बढ़ रहा कुनबा

अरावली वन क्षेत्र जैव विविधता का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। इसकी गोद में पक्षियों का कुनबा भी तेजी से बढ़ रहा है। अब यहां ऐसे पक्षियों की भी प्रजातियां देखने को मिल रही हैं जिनके बारे में प्रचलित था कि ये राज्य विशेष में ही मिलती हैं।

Mangal YadavMon, 27 Sep 2021 04:49 PM (IST)
पेड़ पर बैठा व्हाइट-नेप्ड टिट ’ सौ. सतीश कुमार

 रेवाड़ी [अमित सैनी]। अरावली वन क्षेत्र जैव विविधता का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। इसकी गोद में पक्षियों का कुनबा भी तेजी से बढ़ रहा है। अब यहां ऐसे पक्षियों की भी प्रजातियां देखने को मिल रही हैं, जिनके बारे में प्रचलित था कि ये राज्य विशेष में ही मिलती हैं। अरावली पहाड़ी की गोद में बसे गांव पाड़ला, अहरोद, बासदूधा, खोल, मनेठी, भालखी, माजरा, नांधा, बलवाड़ी व खालेटा के जंगल आपस में जुड़े हुए हैं। इन दस गांवों का जंगल बेहद सघन है, जहां की आबोहवा न सिर्फ पेड़ पौधों के लिए बल्कि जीव जंतुओं के लिए भी बेहतरीन है।

इन घने जंगलों में पक्षियों की बहुत सी ऐसी प्रजातियां देखने को मिल रही हैं जो पहले कभी यहां नजर नहीं आई। कुछ पक्षी प्रेमी जब इन जंगलों में घुसे तो उनको वहां पर व्हाइट-नेप्ड टिट, स्पाटेड ट्री कीपर व शार्ट टेड स्नेक ईगल जैसे पक्षी नजर आए हैं।

 व्हाइट नेप्ड टिट को लेकर अभी तक धारणा यही थी कि यह पूरी दुनिया में सिर्फ आंध्र प्रदेश, राजस्थान व गुजरात के एक दो क्षेत्र में ही दिखाई देते हैं, लेकिन अब इनकी यहां अरावली वन क्षेत्र में मौजूदगी चौंकाने वाली है। इसके अतिरिक्त जिस स्पाटेड ट्री क्रीपर को देखने के लिए पक्षी प्रेमी उत्तराखंड जाया करते थे उसकी भी मौजूदगी इस जंगल में मिली है।

शार्ट टेड स्नेक ईगल जो अपने चूजों को भी केवल सांप मारकर खिलाता है उसके भी घोंसले और चूजे यहां पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर देखने को मिले हैं। पर्यावरणविदों की मानें तो इन पक्षियों का यहां मिलना स्प्ष्ट संकेत दे रहा है कि इस जंगल की आबोहवा बेहतरीन है और यहां पारिस्थितिकी तंत्र भी धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। यहां चार तरह की कोयल, पेंटेड सैंडग्राउज, कठफोड़ा की चार प्रजातियां, बंटिंग की प्रजातियां जैसे क्रस्टेड बंटिंग, राक बंटिंग, स्टीरियो लेटेड बंटिंग, इसके साथ-साथ व्हाइट बैलीज मिनीवेट, स्पाटेड उल्लू, राक ईगल आउल, भारतीय स्कूप्ड उल्लू, मलकोवा, सल्फर बेलीड वारब्लग सहित पक्षियों की लगभग 300 अन्य प्रजातियां भी मौजूद हैं।

 

वन मंडल अधिकारी सुंदरलाल ने बताया कि अरावली क्षेत्र में पक्षियों की ऐसी प्रजातियां देखने को मिली हैं जो पहले भारत के एक दो हिस्सों में ही देखने को मिलती थी। अरावली का यहां अच्छा वन क्षेत्र है। भविष्य में भी इसको संरक्षित रखने का पूरा प्रयास किया जाएगा। यहां जल संरक्षण से लेकर पेड़ पौधों व जीव जंतुओं के संरक्षण को लेकर भी हर स्तर पर कार्य किया जा रहा है।

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