राव तुलाराम फ्लाईओवर: 5 डेडलाइन के बाद भी निर्माण अधूरा, हजारों लोग रोज जूझते हैं जाम से

नई दिल्ली, जेएनएन। साउथ दिल्ली से आउटर रिंग रोड के रास्ते इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (Indira Gandhi International Airport) और गुरुग्राम की तरफ जाने वाले लोगों की राह आसान नहीं हो पा रही है। लोगों को खासतौर से व्यस्त समय में तो भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह है राव तुलाराम फ्लाईओवर (Rao Tularam Flyover) के निर्माण कार्य में हो रही देरी। अपनी वास्तविक डेडलाइन से दो साल से भी ज्यादा पीछे चल रहे राव तुलाराम मार्ग फ्लाईओवर को लोगों के लिए खुलने में अभी और वक्त लग सकता है। फ्लाईओवर के निर्माण के चलते लगने वाले जाम से लोगों को निजात दिलाने में यातायात पुलिस व्यवस्था को संभालने के बजाय चालान काटने में व्यस्त रहती है।

ऐसे में 2.7 किमी लंबे इस फ्लाईओवर के बनने से आउटर रिंग रोड के रास्ते एयरपोर्ट और गुरुग्राम जाने वाले रूट पर लगने वाला जाम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यही वजह है कि दिल्ली की जनता लंबे समय से इस प्रोजेक्ट के जल्द पूरा होने का इंतजार कर रही है। कई डेडलाइन मिस कर चुके इस फ्लाओवर की पिछले साल भी दो डेडलाइंस मिस हुई थी। पहले जुलाई और उसके बाद दिसंबर तक फ्लाईओवर के काम को पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन दिसंबर खत्म होने तक भी काफी काम बाकी था। इसे देखते हुए नई डेडलाइन मार्च तय की गई थी, जो बीत चुकी है। बावजूद इसके अब तक न तो फ्लाईओवर का काम पूरा हुआ और न ही लोगों को जाम की समस्या से निजात मिली।

शुरुआत से ही रहीं दिक्कतें

इस प्रोजेक्ट की राह में शुरू से ही कई तरह की अड़चनें आती रही हैं। चाहे वो कानूनी अड़चन हों या पेड़ों को काटने की अनुमति का मामला हो। एक तरफ पेड़ काटने की अनुमति मिलने में देरी हुई तो दूसरी तरफ ट्रैफिक डायवर्जन नहीं होने के कारण काम धीमा रहा। बीते साल के आखिरी तीन महीनों के दौरान बढ़ते पल्यूशन के चलते निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई थी। ऐसी तमाम अड़चनों की वजह का तो इस प्रोजेक्ट पर असर पड़ा ही, लेकिन एक ऐसी वजह से यह प्रोजेक्ट में देरी हुई, जिसे पीडब्लूडी के अधिकारियों ने भी 'रेयर' माना था। अधिकारियों का कहना था कि फ्लाईओवर का निर्माण कर रही कंपनी भारी वित्तीय घाटे और कैश क्रंचिंग का सामना करना पड़ा, जिसके चलते पिछले करीब एक साल के दौरान इस प्रोजेक्ट की रफ्तार पर काफी असर पड़ा है। निर्धारित समय पर काम पूरा ना होने पर नियमों के तहत पीडब्लूडी ने कंपनी पर करीब 27.8 करोड़ रुपये की पेनाल्टी भी लगाई।

जनवरी तक 80 फीसदी काम हुआ था पूरा

आरटीआर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य जनवरी तक लगभग 80 फीसद पूरा हो चुका था। फ्लाईओवर के 77 में से 57 स्पैन पर गर्डर लगाए जा चुके थे और 46 स्पैन पर फ्लाईओवर का डेक भी बना दिया गया था। 40 स्पैन पर गर्डर डालने और उसके बाद उन सभी पर डेक बनाने का काम बाकी रह गया है। यह काम मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। फेब्रिकेशन का काम फरवरी के अंत तक पूरा होने की उम्मीद थी, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है।

पांच बार मिस हो चुकी हैं डेडलाइन

कुल 278.8 करोड़ के राव तुलाराम मार्ग फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर नवंबर 2014 में काम शुरू हुआ था। इसे दो साल में बनाकर पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन तब तक इसका काम अधूरा है। एक बार डेडलाइन बढ़ने का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वो अब तक चल रहा है। नवंबर 2017 के बाद भी इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन 2 बार बढ़ाई गई और फिर पिछले साल यानी 2018 में भी पहले जुलाई और फिर दिसंबर की डेडलाइनन तय की गई थी। इसके बाद मार्च 2019, जो गुजर चुकी है। 

यातायात पुलिस का पूरा ध्यान सिर्फ चालान पर केंद्रित

राव तुला राम फ्लाईओवर के पास यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए लगाए गए पुलिसकर्मी व्यवस्था को बेहतर करने के बजाय चालान करने में व्यस्त रहते हैं। यही वजह है कि व्यस्त समय में इस फ्लाईओवर के आसपास लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ता है। सुबह और शाम के समय स्थिति यह रहती है कि लोगों को यहां से निकलने में काफी वक्त लगता है । जिससे ईंधन की बर्बादी होने के साथ-साथ लोगों का समय भी बर्बाद होता है।

व्यस्त समय में निर्माण कार्य के कारण बढ़ जाती है परेशानी

फ्लाईओवर के निर्माण कार्य के साथ अगर लोगों की सुविधा पर ध्यान दिया गया होता तो यहां जाम की समस्या ना खड़ी होती। व्यस्त समय में निर्माण कार्य के चलते जाम लगता है। जिससे लोगों को दिक्कत होती है। वाहनों के दबाव को देखते हुए निर्माण करने वाली एजेंसी और संबंधित विभाग को व्यस्त समय के बजाय रात के समय निर्माण कार्य करने को तवज्जो देनी चाहिए थी जिससे निर्माण कार्य भी निर्बाध तरीके से चलता और लोगों को अनावश्यक परेशानी भी नहीं उठानी पड़ती।

के. जगदीसन, संयुक्त आयुक्त (यातायात पुलिस, दिल्ली) का कहना है कि राव तुला राम फ्लाईओवर के पास डायवर्जन किए जाने की संभावना काफी कम है। यातायात पुलिस कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि व्यस्त समय में उनका पूरा ध्यान यातायात व्यवस्था को बेहतर करने और यातायात संचालन की व्यवस्था को सुचारू करने पर रहे। व्यस्त समय में किसी भी स्थान पर अगर यातायात पुलिसकर्मी व्यवस्था बेहतर करने के बजाय समूह में खड़े मिलते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।

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