Delhi: एनजीओ की मदद से दिल्ली का प्रदूषण कम करेगा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग

Delhi गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अनुसार पायलट परियोजना दक्षिण डीएमसी के 104 वार्डों में लगभग 17290 मुद्दों की पहचान करने में सफल रही जिनमें से 10900 (63 फीसद) मुद्दे एसडीएमसी से संबंधित हैं और बाकी 6400 (37 फीसद) मुद्दे अन्य एजेंसियों को सौपे गए हैं।

Jp YadavWed, 27 Oct 2021 10:10 AM (IST)
एनजीओ की मदद से दिल्ली का प्रदूषण कम करेगा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ठंड ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। इसी के साथ आबोहवा भी खराब होने लगी है। समस्या से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने गैर सरकारी संगठन और दक्षिण दिल्ली नगर निगम की सक्रिय भूमिका से प्रदूषण काबू करने की योजना बनाई है। यह पायलट परियोजना दिसंबर 2020 में शुरू की गई थी, जिसमें बिखरे हुए स्त्रोतों से उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों की पहचान, आवंटन और समाधान की परिकल्पना की गई है। पायलट परियोजना से सीख लेते हुए इस साल सर्दियों के मौसम में बिखरे हुए स्त्रोतों से वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए इस परियोजना को उत्तरी और पूर्वी निगम व नई दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) क्षेत्रों में बढ़ाया जा रहा है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अनुसार पायलट परियोजना दक्षिण डीएमसी के 104 वार्डों में लगभग 17,290 मुद्दों की पहचान करने में सफल रही, जिनमें से 10,900 (63 फीसद) मुद्दे एसडीएमसी से संबंधित हैं और बाकी 6,400 (37 फीसद) मुद्दे अन्य एजेंसियों को सौपे गए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत दक्षिणी निगम ने अपने अधिकार क्षेत्र से संबंधित 95 फीसद स्त्रोतों का सफलतापूर्वक निदान कर लिया है।

परियोजना अन्य बातों के साथ-साथ मुख्य रूप से इन चरणों पर केंद्रित है

जमीनी स्तर के अधिकारियों को उनके दैनिक कार्यों और हवा की गुणवत्ता के बीच संबंधों को समझने में मदद करने के लिए संवेदीकरण अभ्यास, वायु प्रदूषण में वृद्धि करने वाले स्त्रोतों की पहचान के लिए थर्ड पार्टी आडिट कराना।, पहचाने किए गए स्त्रोतों का आवंटन और उन्हें संबंधित एजेंसियों को आगे बढ़ाना, संबंधित अधिकारियों द्वारा मुद्दों के समाधान की जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग, शिकायत निवारण प्रक्रिया की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार के लिए स्मार्ट सिटी 311 एप का संवर्धन और मुद्दों का समाधान करते समय जमीनी सर्वेक्षण प्रक्रिया का पालन करने और उच्च मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया की समीक्षा करना।

इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहचान किए प्रमुख प्रदूषण स्त्रोत हैं

कचरे के ढेर वाले स्थान, ऊपर से बहते डलाव, कचरा जलाना, निर्माण और विध्वंस स्थल, सार्वजनिक भूमि पर एकत्रित किया गया मलबा, कच्ची सड़कों से सड़क की धूल, बंजर भूमि, औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण आदि।आयोग द्वारा गत सप्ताह दिल्ली सरकार के अधिकारियों, नगर निगमों, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के आयुक्तों अध्यक्षों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि यह परियोजना उत्तरी डीएमसी, पूर्वी डीएमसी और एनडीएमसी में बुधवार से शुरू हो जाएगी। इससे दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और नोडल अधिकारियों के बीच बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय और अन्य संबंधित एजेंसियों का समर्थन भी मिलेगा। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की गई है। आयोग द्वारा प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, वायु प्रदूषण मॉड्यूल अब एसडीएमसी और ईडीएमसी में नागरिक ऐप पर लाइव है।

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