Delhi-NCR Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक, जगाएं अपना स्वाभिमान

Delhi-NCR Air Pollution दिल्ली-एनसीआर में नवंबर के प्रथम सप्ताह से ही प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक बना हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय की डांट फटकार के बाद भी सरकारें बयानबाजी से ऊपर उठकर ज्यादा कुछ करती नहीं दिख रही हैं।

Sanjay PokhriyalSat, 27 Nov 2021 10:47 AM (IST)
सरकारों के स्तर पर प्रयास के साथ लोगों को आगे आकर अपना योगदान देना चाहिए।

नई दिल्‍ली, अरुण श्रीवास्तव। Delhi-NCR Air Pollution देश की राजधानी होने के कारण दिल्ली हर किसी के लिए महत्वपूर्ण है। देश के हर कोने से लोग यहां आना चाहते हैं। कोई घूमने और खरीददारी के लिए तो कोई नौकरी-रोजगार या फिर पढ़ाई के लिए। नौकरी-रोजगार के लिए आने वाले ज्यादातर लोग दिल्ली या एनसीआर में स्थायी रूप से बस भी जाते हैं।

ऐसे में दिल्ली-एनसीआर की आबादी तेजी से बढ़ने के साथ पिछले कई सालों से वाहनों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल के बजाय ज्यादातर लोग अपने वाहनों से चलना कहीं अधिक सुविधाजनक समझते हैं। इसका एक प्रमुख कारण दिल्ली-एनसीआर के तमाम इलाकों में सार्वजनिक परिवहन के साधनों की उपयुक्त व्यवस्था न हो पाना हो सकता है। आवश्यकता से कई गुना वाहन होने और कल-कारखानों के कारण दिल्ली-एनसीआर पिछले कई वर्षों से प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है।

बेशक मेट्रो रेल की सेवाएं तेजी से बढ़ रही हैं, इसके बावजूद तमाम कारणों से यहां प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ना बेहद चिंताजनक है। नवंबर के महीने में पराली के कारण इस समस्या के और विकराल हो जाने से लोगों की जीवन संकट में पड़ जाता है। चिंताजनक यह भी है कि सर्वोच्च न्यायालय तक की लगातार टिप्पणी और निर्देश के बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव होता नहीं नजर आ रहा है। निर्माण कार्यों पर रोक लगाने और सड़कों पर पानी के छिड़काव जैसे उपाय भी अधिक कारगर नहीं साबित हो रहे। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में और गंभीरतापूर्वक सोचने और उस पर सतत निगरानी के साथ अमल भी करने की जरूरत है, ताकि लोगों को दमघोंटू हवा से निजात मिल सके।

पढ़ाई-रोजगार का बड़ा डेस्टिनेशन: दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय जैसे बड़े और प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों के अलावा कई अन्य शिक्षा और शोध संस्थान हैं। इनमें उच्च शिक्षा हासिल करना देशभर के युवाओं का सपना होता है। यही कारण है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली छात्र जेएनयू और डीयू में दाखिला लेते हैं। इसके अलावा, दिल्ली सिविल सेवा, बैंकिंग, सीए, नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का भी बड़ा केंद्र है। दिल्ली के मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर्स की बेशुमार संख्या देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इनमें पढ़ने या यहां रहकर तैयारी करने के लिए भी देशभर से बड़ी संख्या में युवा आते हैं। इसके अलावा, सरकारी-निजी नौकरियों और रोजगार के सिलसिले में भी देशभर से लोगों का यहां आना होता है।

दरअसल, अपने राज्य, शहर या गांव-कस्बे में रोजगार के अभाव में लोग यह सोचकर दिल्ली का रुख कर लेते हैं कि यहां कोई न कोई काम तो उन्हें मिल ही जाएगा। काम मिल जाने पर वे अपना परिवार भी ले आते हैं और फिर यहीं बस जाते हैं। यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है। जाहिर है कि जब लोग बढ़ेंगे, तो उनके लिए आवागमन के साधन भी उसी अनुपात में तेजी से बढ़ेंगे। ऐसे में धूल और धुआं भी बढ़ेगा ही। लेकिन यह इतना बढ़ जाए कि जीना ही मुश्किल हो जाए, तो सरकारों के साथ हर किसी को सोचने की जरूरत है कि आखिर इससे बचने के लिए कौन-सा उपाय अपनाया जाए, जो पूरी तरह कारगर साबित हो। अब अस्थायी उपायों से कतई काम नहीं चलने वाला।

राज्य भी करें सार्थक पहल: किसी राज्य से पढ़ाई या रोजगार के सिलसिले में पलायन खुद उसके लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता। यदि राज्य में ही गुणवत्तायुक्त उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ाने, उन्हें प्रोत्साहित करने के साथ रोजगार बढ़ाने की दिशा में भी समुचित उपाय करने की दिशा में ईमानदारी से कदम उठाए जाएं, तो जाहिर है इससे लोगों का पलायन कम होगा। जब शिक्षा और रोजगार के अवसर राज्य और शहर या उसके आसपास ही उपलब्ध होंगे, तो कोई घर-परिवार छोड़कर बाहर क्यों जाना चाहेगा। रोजगार बढ़ाने के लिए राज्यों को कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रित रखते हुए अपने यहां बाधारहित उद्योगों की स्थापना के लिए भी लगातार प्रोत्साहन देना होगा। कुछ राज्य इसके लिए प्रयास कर भी रहे हैं, लेकिन अभी इस दिशा में काफी कुछ किया जाना बाकी है।

निजी शिक्षण संस्थान बढ़ाएं अपनी गुणवत्ता: पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली और एनसीआर सहित विभिन्न राज्यों में निजी शिक्षा संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन विडंबना यह है कि कुछ एक संस्थानों को छोड़कर ज्यादातर शिक्षा की दुकान ही प्रतीत हो रहे हैं। उनका मकसद देश के युवाओं को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने के साथ नौकरी उपलब्ध कराने में सहयोग करने या रोजगार सक्षम बनाने के बजाय अधिक से अधिक पैसा कमाना ही लगता है। इस स्थिति को देखते हुए ही ज्यादातर अभिभावक और छात्र वहां पढ़ने के बजाय दिल्ली-एनसीआर का रुख कर लेते हैं कि शायद वहां उन्हें बेहतर शिक्षा के साथ रोजगार के कहीं अच्छे अवसर मिल सकेंगे। यदि निजी शिक्षण संस्थान देश की युवा पीढ़ी के प्रति अपने कर्तव्यों को समझते हुए उनका समुचित निर्वहन करें, तो उन्हें अपने शहर में ही गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिल सकेगी और तब देश और दुनिया की कंपनियां भी वहां जाकर उन संस्थानों के प्लेसमेंट के लिए पहल करने में रुचि लेंगी। हालांकि कुछ शिक्षण संस्थान ऐसी पहल कर भी रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या नगण्य ही है। युवाओं को अपने शहर या आसपास अच्छी शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध होने की स्थिति में निश्चित ही वे दिल्ली की दौड़ लगाकर वहां भीड़ नहीं बढ़ाएंगे। इसके लिए राज्यों के साथ केंद्र सरकारों को भी समुचित उपाय करने चाहिए।

बेहतर हों सार्वजनिक परिवहन के साधन: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ाने में आवागमन के लिए बड़ी संख्या में निजी वाहनों का इस्तेमाल भी है। बेशक दिल्ली के तमाम इलाके मेट्रो रेल की सुविधा से जुड़ गए हैं, इसके बावजूद ज्यादातर लोग निजी साधनों का ही उपयोग करना पसंद करते हैं। इसका एक बड़ा कारण मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने और वहां से अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचने के साधनों की उपयुक्त व्यवस्था न होना है। यदि सरकारें इस पर ध्यान दें, तो प्रदूषण से पीड़ित ज्यादातर लोग निजी साधनों के बजाय सार्वजनिक साधनों के इस्तेमाल पर विचार कर सकते हैं।

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