कोरोना के नए स्वरूप के 30 से ज्यादा म्यूटेशन, कम हो सकता है टीके का प्रभाव : गुलेरिया

एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने आशंका व्यक्त की है कि इस स्वरूप के स्पाइक एरिया में 30 से ज्यादा म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) के कारण टीके का प्रभाव भी कम हो सकता है।कहा कि इस स्वरूप के स्पाइक प्रोटीन एरिया में 30 से भी ज्यादा म्यूटेशन हो चुके हैं।

Prateek KumarSun, 28 Nov 2021 10:19 PM (IST)
दक्षिण अफ्रीका में मिला है कोरोना का नया स्वरूप ओमिक्रोन

नई दिल्ली [राहुल चौहान]। दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रोन को लेकर एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने आशंका व्यक्त की है कि इस स्वरूप के स्पाइक एरिया में 30 से ज्यादा म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) के कारण टीके का प्रभाव भी कम हो सकता है। गुलेरिया ने कहा कि इस स्वरूप के स्पाइक प्रोटीन एरिया में 30 से भी ज्यादा म्यूटेशन हो चुके हैं, जिसके चलते यह टीके को भी चकमा दे सकता है। उन्होंने बताया कि अधिकांश टीके स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ एंटीबाडी बनाकर काम करते हैं। इसलिए स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में इतने सारे परिवर्तन से कोरोनारोधी टीकों का प्रभाव कम हो सकता है।

टीके कितने असरदार, गंभीरता से होनी चाहिए जांच

डा. गुलेरिया ने यह भी कहा है कि इस नए स्वरूप पर कोरोनारोधी टीके कितने असरदार हैं, इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। स्पाइक प्रोटीन की उपस्थिति पोषक कोशिका में वायरस के प्रवेश को आसान बनाती है और इसे फैलने देने और संक्रमण पैदा करने के लिए जिम्मेदार है।

 

भविष्य सुरक्षित रखने के लिए बारीकी से रखी जा रही वायरस पर नजर 

उन्होंने कहा कि भविष्य की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके प्रसार, तीव्रता और प्रतिरक्षण क्षमता को बढ़ाने के लिए क्या सामने आता है। वहीं, अधिकारियों कहना है कि भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक कंसोर्टिया इनसाकोग कोरोना वायरस के नए स्वरूप (बी.1.1.1.529) पर बारीकी से नज़र रख रहा है। साथ ही देश में अभी तक इसकी उपस्थिति की पुष्टि नहीं हुई है।

दोनों डोज टीके और कोरोना से बचाव के नियमों का पालन जरूरी

डा गुलेरिया ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और उस क्षेत्र में जहां मामलों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है, दोनों से बहुत सतर्क और पैनी नजर रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। साथ ही कोरोना से बचाव के सभी नियमों का पालन करने की भी सलाह दी है। डा. गुलेरिया ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों को टीके की दोनों डोज लग चुकी हैं या नहीं। जिन्होंने अभी तक दोनों डोज नहीं ली हैं, उन्हें टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया जाए।

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