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EXCLUSIVE: दिल्ली में भी कांग्रेस को जल्द लग सकता है बड़ा झटका, सही समय के इंतजार में नेताजी

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। बगावत की चिंगारी कांग्रेस में बाहर के कई राज्यों में ही नहीं, बल्कि राजधानी दिल्ली में भी तेजी से सुलग रही है। अपनी अनदेखी से परेशान वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद स्तर के नेता जहां सही समय का इंतजार कर रहे हैं, वहीं नगर निगम की राजनीति में कांग्रेस के कुछ बड़े नाम जल्द ही किसी और पार्टी के साथ जुड़े नजर आ सकते हैं।

शीला दीक्षित के निधन से लगा है पार्टी को झटका

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया तो पार्टी नेताओं को थोड़ी उम्मीद लगी कि दिल्ली में कांग्रेस बेहतर कर सकती है। उनके नेतृत्व में स्थिति सुधरी भी और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस दिल्ली में दूसरे नंबर पर रही, लेकिन उनके निधन से पार्टी हाशिए पर आने लगी।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में सिर्फ 4 फीसद वोटरों पर सिमटी कांग्रेस

वरिष्ठ नेता सुभाष चोपड़ा की अगुवाई में पार्टी 2020 के विधानसभा चुनाव में उतरी और सिर्फ चार फीसद वोटों पर सिमट गई। इसके बाद तो स्थिति और भी नीचे चली गई है। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर युवा नेता अनिल चौधरी को चार माह बाद भी न तो अधिकांश नेता-कार्यकर्ता स्वीकार कर पाए हैं और न वह स्वयं ही सबको साथ लेकर चलने का कोई करिश्मा कर पाए हैं। इसीलिए मौजूदा सूरते हाल में नेताओं-कार्यकर्ताओं को दिल्ली कांग्रेस का भी कोई सियासी भविष्य नजर नहीं आ रहा।

कई नेता AAP में तलाश रहे ठिकाना

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक पार्टी के सभी नामी पूर्व विधायक, मंत्री व सांसद कोई बड़ा कदम उठाने के लिए फिलहाल सही समय का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन नगर निगम चुनाव में चूंकि डेढ़ साल के आसपास ही समय बचा है, इसीलिए बहुत से मौजूदा और पूर्व पार्षदों में बैचेनी और हलचल शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि नगर निगम की राजनीति में कांग्रेस का एक बड़ा नाम अपने साथ काफी पार्षदों को लेकर आम आदमी पार्टी का रुख कर सकता है। बहुत से कददावर नेताओं ने कोरोनाकाल के निपटते ही प्रदेश संगठन के नेतृत्व में बदलाव का तानाबाना अभी से बुनना शुरू कर दिया है।

शक्ति सिंह गोहिल बोले- पार्टी के नेता समझदार-अनुभवी हैं

शक्ति सिंह गोहिल (प्रभारी, दिल्ली कांग्रेस) का कहना है कि दिल्ली की सियासी स्थिति को लेकर अभी कुछ कहना मुश्किल है। पार्टी के नेता समझदार-अनुभवी हैं। वैसे भी हर राज्य के हालात अलग होते हैं। देखते हैं, आगे क्या कुछ रहता है।

महाबल ने मिलाया कपिल सिब्बल के सुर में सुर

कांग्रेस के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के सुर में सुर मिलाकर प्रदेश कांग्रेस की बगावत को पुष्ट कर दिया है। फिलहाल पार्टी से निलंबित चल रहे महाबल ने कहा कि कांग्रेस में वरिष्ठों की लगातार अनदेखी हो रही है। किसी की परेशानी या शिकायत न सुनी तक नहीं जा रही, उसे दूर करने का तो सवाल ही नहीं उठता। यह पार्टी के लिए कतई हितकर नहीं है। अगर कोई नाराज है तो उसकी नाराजगी हर हाल में सुनी जानी चाहिए और जहां तक भी संभव हो, उसे दूर किया जाना चाहिए।

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