23 मरीजों के भागने के मामले के बाद अस्पताल प्रशासन सख्त, अब हर शिफ्ट में होगी मरीजों की गिनती

अब हर शिफ्ट में गिनती करने होंगे मरीज।

अब अस्पताल प्रशासन सख्त हो गया है। इसलिए अब नर्सों की जिम्मेदारी होगी कि वह मरीजों की गिनती करके जानकारी प्रशासन को दें। इसलिए अब जब भी नर्सिंग स्टाफ की शिफ्ट बदलेगी तो उसे अपने वार्ड से संबंधित मरीजों की गिनती करनी होगी।

Prateek KumarSat, 15 May 2021 06:10 AM (IST)

नई दिल्ली [निहाल सिंह]। उत्तरी निगम के बाड़ा हिंदूराव अस्पताल से 23 मरीजों के भागने की घटना के बाद अब अस्पताल प्रशासन सख्त हो गया है। इसलिए अब नर्सों की जिम्मेदारी होगी कि वह मरीजों की गिनती करके जानकारी प्रशासन को दें। इसलिए अब जब भी नर्सिंग स्टाफ की शिफ्ट बदलेगी तो उसे अपने वार्ड से संबंधित मरीजों की गिनती करनी होगी। वहीं, अगर कोई मरीज बिस्तर पर नहीं हैं तो उसका 30-40 मिनट इंतजार करना होगा। ताकि कोई मरीज बाथरुम गया हो तो वह वापस आ जाए। इसके बाद अगर मरीज नहीं आ रहा है तो इसकी जानकारी हेल्प डेस्क और पूछताछ सेक्शन को देनी होगी। फिर वह आगे की कार्रवाई करेंगे।

दरअसल, हिंदूराव अस्पताल से 23 कोरोना मरीजों के भागने की घटना ने इतना तूल पकड़ा कि प्रशासन में खलबली तो मच ही गई बल्कि उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इसकी जांच के आदेश दे दिए थे। उल्लेखनीय है कि दैनिक जागरण ने 8 मई के संस्करण में 23 कोरोना संक्रमित मरीजों के अस्पताल से बिना बताए जाने यानि भागने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

अस्पताल से जुड़ी एक नर्स ने बताया कि पहले हम केवल मेडिको लीगल केस (एमएलसी) के मामले में मरीज जब भाग जाता था तो उसकी जानकारी देते थे लेकिन अब हमें हर शिफ्ट में मरीजों की गिनती करनी है। अगर, मरीज बिस्तर पर न मिले तो हेल्प डेस्क और पूछताछ सेक्शन को इसकी जानकारी देनी है। उनके पास पर दाखिल हुए मरीज का पूरा विवरण होता है वहीं, आगे की कार्रवाई करेंगे।

उत्तरी निगम के इस समय तीन अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। जिसमें 250 बिस्तर हिंदूराव अस्पताल में हैं तो वहीं 100 बिस्तर बालकराम में और 100 बिस्तर राजनबाबू टीबी अस्पताल में हैं।

19 मरीजों का लगा लिया था पता

हिंदूराव से 23 मरीजों के भागने के मामले में निगम ने उनका पता लगा लिया था। निगम ने इसके लिए जांच बैठाई थी। जिसमें नर्सों से लेकर अन्य स्टाफ से इसको लेकर जानकारी मांगी गई थी। जांच के बाद निगम ने बताया था कि 23 में चार मरीजों का डाटा गलती से भागने वाले मरीजों के रजिस्टर में चढ़ गया था वहीं 19 मरीज ऐसे थे जो अस्पताल के आपातकालीन वार्ड से कोरोना मरीजों के लिए बनाए गए वार्ड में स्थानांतरित करने से पहले ही बिना बताए गए चले गए थे। यह लोग दूसरे अस्पतालों में इलाज मिलने पर अस्पताल से गए थे। इनमें 16 मरीज ठीक हो चुके हैं तो वहीं चार की अस्पतालों से छुट्टी होने के बाद मृत्यु हो गई थी।

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