मंदिर के हित में हर संभव निर्णय लेंगे प्रशासक, गंदगी, अतिक्रमण और अवैध निर्माण की समस्याओं से मिलेगी मुक्ति

पूजा की बारी से लेकर तमाम मुद्दों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह की पीठ ने जेआर मिधा को प्रशासक नियुक्त कर आठ सप्ताह के अंदर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

Prateek KumarTue, 28 Sep 2021 10:55 AM (IST)
कालकाजी मंदिर के पुनर्विकास के लिए न्यायमूर्ति जेआर मिधा को प्रशासक नियुक्त कर हाई कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। गंदगी, अतिक्रमण और अवैध निर्माण की समस्याओं को मुक्त कर कालकाजी मंदिर के कायाकल्प की जिम्मेदारी दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जेआर मिधा को दी है। पूजा की बारी से लेकर तमाम मुद्दों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह की पीठ ने जेआर मिधा को प्रशासक नियुक्त कर आठ सप्ताह के अंदर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर के आसपास हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माण को हटाने-ध्वस्त करने से लेकर पुनर्विकास योजना तैयार करने की निगरानी करेंगे। इस दौरान मंदिर पर प्रशासक का पूरा नियंत्रण होगा। प्रशासक को अपनी मदद के लिए कोषाध्यक्ष व सचिव को नियुक्त करने की अनुमति होगी। नीता भारद्वाज बनाम कमलेश शर्मा की याचिका पर सुनवाई के बाद पीठ ने प्रशासक के साथ ही एक वास्तुकार की नियुक्ति का निर्देश देते हुए आठ सप्ताह के अंदर पुनर्विकास योजना पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

प्रशासक नियुक्त करने के फैसले का स्वागत

वहीं, कालकाजी मंदिर के कायाकल्प के लिए प्रशासक नियुक्त करने के फैसले का मंदिर से जुड़े लोगों ने स्वागत किया है। मंदिर के महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि हाई कोर्ट के फैसले से मंदिर के कायाकल्प की योजना सिरे चढ़ेगी। हालांकि महंत ने कहा कि फैसले के कुछ बिंदुओं के खिलाफ अपील की जाएगी। उन्होंने बताया कि मंदिर के चारों ओर अतिक्रमण है, अवैध दुकानें खोल दी गई हैं। पुलिस से बार-बार शिकायत के बावजूद करीब 70 दुकानें अवैध तरीके से यहां पर खोल दी गई हैं। इसकी वजह से साफ-सफाई की व्यवस्था को ठीक से लागू करने में परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि अब जल्द ही मंदिर का कायाकल्प हो सकेगा और व्यवस्था ठीक होगी।

पुनर्विकास में आर्थिक मदद के लिए खोलें बैंक खाता

पीठ ने प्रशासक और उनकी टीम को निर्देश दिया कि वे तत्काल मंदिर परिसर में एक बैंक खाता खोल सकते हैं। जो भी श्रद्धालु मंदिर के पुनर्विकास में अपने योगदान देने के लिए दान देना चाहते हैं वे आनलाइन माध्यम से बैंक में दान दे सकते हैं।

प्रशासक तय करेंगे मंदिर में दानपात्र का स्थान

प्रशासक मंदिर परिसर में रखे जाने वाले दान पात्रों का स्थान तय कर सकते हैं और उनके पास ही इसकी चाभी होगी, जो हर महीने बदली जाएगी। दानपात्रों को प्रशासक और बारीदार के प्रतिनिधि की मौजूदगी में ही खोला जाना चाहिए। दान से मिलने वाली रकम पुजारी के कमरे में रखी तिजोरी में रखी जाए।

हटाए जाएंगे अवैध कब्जेदार व अतिक्रमण

पीठ ने कहा कि श्रद्धालुओं के मंदिर जाने की राह में अवैध निर्माण व अतिक्रमण करने वालों को हटाया जाए। कानूनी अधिकार या किसी अदालती आदेश के बगैर कब्जा करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस व एसडीएमसी हटाने की कार्रवाई करे। प्रशासक मंदिर की भूमि को संरक्षित करने लिए निर्देश भी दे सकते हैं।

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