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एलएलबी का छात्र चला रहा था फर्जी कॉल सेंटर, आठ दबोचे

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली :

फर्जी कॉल सेंटर से लोगों के साथ ठगी करने के मामले में तीन महिलाओं सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कॉल सेंटर का संचालक एलएलबी का छात्र है। उसकी पहचान दिल्ली के न्यू उस्मानपुर निवासी अनिल सिंह के रूप में हुई है। कॉल सेंटर में काम कर रहे अन्य आरोपितों की पहचान द्वारका निवासी गौतम, न्यू उस्मानपुर निवासी अमित, नाथूपुरा निवासी विनय, आरके पुरम निवासी राहुल, रजनी, इशिका और संगीता के रूप में हुई है। कॉल सेंटर पिछले छह माह से संचालित किया जा रहा था और करीब 650 लोगों के साथ अब तक ठगी की जा चुकी है।

स्पेशल सेल के डीसीपी अन्येष रॉय ने बताया कि रजत शर्मा ने 64 हजार 680 रुपये की ठगी की शिकायत की थी। रजत ने बताया कि उनके पिता दूसरे क्रेडिट कार्ड के लिए इंटरनेट पर बैंक का कस्टमर केयर नंबर ढूंढ रहे थे। उन्हें एक नंबर मिला, उस पर पहले महिला ने बात की, फिर राकेश शर्मा नाम के व्यक्ति ने बात की और वर्तमान में प्रयोग किए जा रहे क्रेडिट कार्ड की सारी डिटेल व ओटीपी लेकर ठगी की है। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करने के साथ लेन-देन और जिस नंबर पर बात हुई थी, उसके आधार पर आरोपितों के बारे में बता लगाया गया। मौके पर पुलिस ने छापा मारा तो पता लगा कि फर्जी कॉल सेंटर का संचालन करके लोगों के साथ ठगी की जा रही है। मौके से कॉल सेंटर संचालक व तीन महिलाओं सहित आठ लोगों को गिरफ्तार करने के साथ काफी सामान बरामद किया गया है।

पूछताछ में पता लगा कि सभी आरोपी मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं। अनिल एलएलबी कर रहा है जबकि गौतम बीए तीसरे वर्ष का छात्र है। आरोपित अमित बीसीए बीच में छोड़ चुका है। तीनों महिलाओं सहित अन्य स्कूल के दौरान पढ़ाई छोड़ चुके हैं। मुख्य आरोपित अनिल ने बताया कि उसने कुछ कॉल सेंटरों में टेलीकॉलर के रूप में काम किया था। जल्दी पैसा कमाने के लिए उसने अपना फर्जी कॉल सेंटर शुरू किया। आरोपित रजनी उसकी मैनेजर थी। आरोपितों ने ऐसी व्यवस्था की कि जब कोई बैंक के कस्टमर केयर का नंबर सर्च इंजन पर ढूंढे तो उनके फर्जी नंबर खोज में सामने आने की संभावना बढ़ जाए। ग्राहक जब इन फर्जी नंबरों पर कॉल करता, तो महिला कॉल रिसीव करती। नाम, पता और फोन करने का कारण पूछने के बाद महिला कॉल को वरिष्ठ प्रबंधक को ट्रांसफर करने का दिखावा करती। तथाकथित प्रबंधक ग्राहक से उसके कार्ड का नंबर, सीवीवी और ओटीपी लेता और उसे तब तक फोन पर व्यस्त रखता, जब तक उसके उसके कार्ड से पैसे न निकाल लिए जाएं। इसके बाद ग्राहक के नंबर और ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता।

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