छात्रों को उद्यमी बनाने के लिए माइनर डिग्री प्रोग्राम शुरू करेगा आइआइटी

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली:

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आइआइटी-डी) आगामी सत्र में मानइर डिग्री प्रोग्राम शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके जरिये छात्रों को उद्यमी बनने की दिशा में प्रेरित किया जाएगा। इस प्रोग्राम के तहत छह कोर्स शुरू होंगे। साथ ही आइआइटी दिल्ली की फैकल्टी को स्टार्ट अप से जोड़ने के लिए भी एक अन्य प्रोग्राम शुरू होगा। शनिवार को आइआइटी दिल्ली के निदेशक वी. रामगोपाल राव ने प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि आइआइटी दिल्ली में हाल ही में एक अध्ययन किया गया, जिसमें सामने आया कि परिसर का हर दूसरा छात्र उद्यमी बनना चाहता है। वहीं, दूसरा पक्ष यह भी है कि छात्रों को उद्यमशीलता की बारीकियां पता नहीं होती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने निर्णय लिया है कि माइनर डिग्री प्रोग्राम के जरिये छात्रों का मार्गदर्शन किया जाएगा। माइनर डिग्री प्रोग्राम के बारे में बताते हुए प्रो. रामगोपाल ने कहा कि इस प्रोग्राम में छात्रों को छह कोर्स पूरे करने होंगे। इसके बाद एक परीक्षा होगी, जिसके बाद छात्रों को माइनर डिग्री मिलेगी। पहली बार शुरू होगा डिप्लोमा कोर्स

आइआइटी दिल्ली में पहली बार छह महीने का डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की भी योजना है। इसमें साइंस विषय से स्नातक तक पढ़ाई करने वाला कोई भी छात्र दाखिला ले सकता है। कई बार यह भी देखने में आता है कि इंडस्ट्री में काम करने वाले लोग कोर्स करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें जरिया नहीं मिलता। इस डिप्लोमा कोर्स से उन्हें सीधा फायदा मिलेगा। फिलहाल, दो डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की तैयारी है। इसमें आर्टिफिशीयल इंटेलीजेंस (एआइ) और विजनरी लीडर्स फॉर मैन्यूफैक्चरिग (वीएलएफएम) कोर्स शामिल हैं। शुरू होंगे दो नए सेंटर

प्रो रामगोपाल ने बताया कि आइआइटी दिल्ली में दो नए सेंटर भी जल्द शुरू किए जाएंगे। ये सेंटर फॉर ऑटोमोटिव रिसर्च एंड मेथोडोलॉजी और सेंटर फॉर साइबर फिजिकल सिस्टम है। इन दोनों पाठ्यक्रम में आने वाले सप्ताह में डीन की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही फैकल्टी सदस्यों की नियुक्ति होगी। सीएआरएम में इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों से संबंधित पाठ्यक्रम होंगे। इन दोनों सेंटर में मास्टर के पाठ्यक्रम शुरु किए जाएंगे। इसके अलावा आइआइटी-डी में शुरू की गई प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस स्कीम के तहत जिस व्यक्ति को आइआइटी इंडस्ट्री की जानकारी होगी, वो बिना पीएचडी के छात्रों को पढ़ा सकेंगे। इसके लिए लगभग 10 साल का अनुभव मांगा गया है।

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