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किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई न हो प्रभावित, इसके लिए प्रयास जारी : नीरा

जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली : कोरोना महामारी के दौर में मजदूर व कम आय वर्ग के लोग परिवार के साथ गांव की ओर पलायन कर चुके हैं। यह एक चिता का विषय है। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के पश्चिमी जोन में शिक्षा विभाग की उप-निदेशक नीरा बताती हैं कि निगम स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे इन्हीं परिवारों से आते हैं। माता-पिता के साथ बच्चे भी गांव का रुख कर चुके हैं। ऐसे में डर है कि जब स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के बाद स्कूल खुलेंगे तो उस समय कक्षाओं में बच्चों की संख्या कम हो सकती है। उन बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटती है तो इससे बच्चों के साथ-साथ शिक्षा विभाग का भी काफी हानि होगी। ये बच्चे देश का भविष्य व नींव हैं। शिक्षा का हमारे देश की नींव को मजबूत बनाने में अहम योगदान है। जब भी स्कूल अनलॉक हो, सभी बच्चे स्कूल पहुंचे, इसके लिए अध्यापकों व स्कूल प्रधानाचार्य को निर्देश दिए गए हैं कि वे फोन के माध्यम से बच्चों के संपर्क में रहें।

नीरा ने बताया कि अधिकांश बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं है, वे ऑनलाइन कक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे बच्चों को फोन पर चीजों को समझाएं। साथ ही उन्हें प्रेरित करें ताकि वे पढ़ाई के साथ जुड़े रहें। बच्चे अपने माता-पिता से अधिक शिक्षक की बात को महत्ता देते हैं। इसलिए शिक्षक पूरी कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों को शिक्षा से बांधे रखें। इसके लिए बच्चों को किताबें उपलब्ध करा दी गई है, ताकि उनकी रुचि बनी रहे। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पढ़ाई बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी नया अनुभव है। पर हमारी पूरी कोशिश रहती है कि ऑनलाइन कक्षा अधिक से अधिक प्रभावी हो, इसके लिए वीडियो की मदद ली जा रही है। असल में वीडियो को देखकर बच्चे कठिन विषयों को भी आसानी से समझ लेते हैं। पश्चिमी जोन में कई ऐसे अध्यापक हैं जो स्वयं वीडियो तैयार कर रहे हैं। नीरा ने बताया कि स्कूल फिलहाल बंद हैं, लेकिन कुछ कर्मचारी स्कूल में रहते हैं। ताकि जो अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं, उन्हें निराश न होना पड़े।

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