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दिशानिर्देश का पालन कर ही दे सकते हैं कोरोना को मात : डॉ. केके अग्रवाल

जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली : कैर गांव स्थित भगिनी निवेदिता कॉलेज में शुक्रवार को कोरोना के साथ कैसे दोबारा जीवन को शुरू किया जाए, इस विषय पर हेल्थ केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। साथ में कॉलेज की प्राचार्य डॉ. चारू शर्मा, संयोजक डॉ. विशाल चौधरी और डॉ. पूर्णिमा ढाल भी उपस्थित रहीं। वेबिनार में विभिन्न कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ कई चिकित्सकों ने भी हिस्सा लिया।

इस दौरान डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि दिन-प्रतिदिन कोरोना के मामलों में इजाफा हो रहा है। पर हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि अब जो मामले सामने आ रहे हैं, उनमें संक्रमण का प्रभाव काफी कम है। यानि संक्रमण की चपेट में आने के बाद तीन से पांच दिन के भीतर लोग ठीक हो रहे हैं। हालांकि बुजुर्गो व अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को थोड़ी परेशानी हो रही है, पर कई मामलों में ऐसे लोगों ने भी फिर से स्वस्थ होकर समाज के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक लॉकडाउन को लागू रखना देश की आर्थिक स्थिति के लिए उचित निर्णय नहीं होगा, क्योंकि कोरोना के खिलाफ विश्वव्यापी लड़ाई अभी लंबी चलेगी। ऐसे में लॉकडाउन कब तक रख सकते हैं, यह बड़ा सवाल है। लॉकडाउन-4 में मिली छूट के बाद धीरे-धीरे जीवन के पटरी पर लौटने की कवायद शुरू हो गई है, लेकिन इस दौरान कई जगह शारीरिक दूरी का उल्लंघन देखने को मिलता है। लोगों को चाहिए कि वे स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देश को जीवनशैली का मुख्य अंग बनाएं, क्योंकि केवल एहतियात ही कोरोना को मात देने का एकमात्र उपाय है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपनी आदत में थोड़ा सा बदलाव लाएं। मास्क जरूर पहनें और समय-समय पर हाथ धोने की आदत डालें।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अगर आपके घर में कोई मेहमान आता है या कोई कारीगर आता है तो उससे शारीरिक दूरी बनाते हुए सीधे बात करने से बचें, यानि आगे-पीछे या इधर-उधर खड़े होकर बात करें। इस अवसर पर कॉलेज के प्रोफेसरों ने वक्ता के समक्ष सवाल रखा कि शारीरिक दूरी का पालन करते हुए कक्षा कैसे आयोजित की जाए। इस पर वक्ता ने प्रोफेसरों के समक्ष कई उदाहरण रखे। विद्यार्थियों ने भी अपने कई सवाल रखे, जिनका उन्हें उत्तर मिला।

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