T20 world cup 2021 में टीम इंडिया के लिए इन मामलों में MS Dhoni की राय होगी बेहद अहम

भारतीय टीम के साथ एक महीने जुड़कर धौनी को क्या फायदा होगा। उन्हें यह आकलन करने का मौका मिलेगा कि क्या वह सीधे मेंटर बनकर अगले आइपीएल के लिए सीएसके की रिटेंशन फीस बचा सकते हैं। धौनी ने आइपीएल में अपने भविष्य को लेकर खुलकर कुछ नहीं कहा है।

Sanjay SavernSat, 16 Oct 2021 08:47 PM (IST)
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान धौनी के साथ विराट कोहली (एपी फोटो)

नई दिल्ली, प्रेट्र। चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) को चौथी बार आइपीएल खिताब दिलाने के बाद महेंद्र सिंह धौनी अब टी-20 विश्व कप में मैदान के बाहर टीम इंडिया के मेंटर की भूमिका में होंगे और पिछले 17 वर्ष मैदान के अंदर अपने फन का लोहा मनवाने के बाद मैदान से बाहर की इस भूमिका में उन्हें देखना दिलचस्प होगा। इसमें धौनी का काम अपने अनुभव और समझ को साझा करने का होगा लेकिन यह कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री पर निर्भर करेगा कि वह उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।

भारतीय क्रिकेट में मेंटर शब्द के व्यापक मायने हैं जो एक रणनीतिकार या सलाहकार हो सकता है। धौनी के मामले में वह सलाहकार हो सकते हैं क्योंकि बड़े टूर्नामेंट नहीं जीतने के बावजूद यह भारतीय टीम काफी दबाव में है। धौनी को जानने वालों को पता है कि वह जरूरत पड़ने पर ही बोलेंगे और शास्त्री या कोहली के काम में कभी दखल नहीं देंगे। इस टीम के अधिकांश सीनियर खिलाड़ियों के वह कप्तान रहे हैं जिन्होंने उनके कप्तान रहते पदार्पण किया और उनके मार्गदर्शन से सुपरस्टार बने।

भारतीय टीम के साथ एक महीने जुड़कर धौनी को क्या फायदा होगा। उन्हें यह आकलन करने का मौका मिलेगा कि क्या वह सीधे मेंटर बनकर अगले आइपीएल के लिए सीएसके की रिटेंशन फीस बचा सकते हैं। धौनी ने आइपीएल में अपने भविष्य को लेकर खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन अगर वह कोहली की टीम को मदद करने में सफल रहे तो अगले सत्र में आइपीएल में मैदान पर मौजूद रहे बिना मेंटर की भूमिका में सीएसके के साथ हो सकते हैं। धौनी अपने फैसलों को थोपने में विश्वास नहीं रखते। उनका मानना है कि फैसले बाध्यता में नहीं लिए जाते। बतौर सलाहकार कुछ मसलों पर उनकी राय काफी मायने रखेगी। मसलन रोहित शर्मा के साथ पारी का आगाज केएल राहुल करेंगे या ईशान किशन। चूंकि सीएसके में रुतुराज गायकवाड़ और फाफ डुप्लेसिस की सलामी जोड़ी काफी कामयाब रही है। इसके अलावा हार्दिक पांड्या को सिर्फ बल्लेबाज के रूप में उतारने या शार्दुल ठाकुर को आलराउंडर के तौर पर खिलाने को लेकर भी उनसे राय ली जा सकती है। टीम संयोजन और रणनीति से जुड़े मसलों पर धौनी की राय काफी मायने रखेगी।

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