सुनील गावस्कर ने BCCI को दिया अपने लोगो और स्वेटर के रंग का पेटेंट कराने का सुझाव, जानिए इसके पीछे की वजह

Sunil gavaskar column जब से भारत ने टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया है तब से भारत की कैप एक जैसी ही रही है। बीसीसीआइ के लिए लोगो और स्वेटर के रंग का पेटेंट कराना एक अच्छा विचार होगा ताकि कोई और उनका इस्तेमाल न कर सके।

Viplove KumarSat, 27 Nov 2021 11:58 PM (IST)
पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धौनी (फाइल फोटो)

सुनील गावस्कर का कालम। टेस्ट सीरीज के बारे में कुछ शानदार चीजें हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का यह सबसे पुराना प्रारूप फास्ट फूड की तरह उतना आकर्षक नहीं है और साथ ही इस पीढ़ी की तरह तेज भी नहीं है लेकिन कुछ खिलाड़ी जानते हैं कि यह प्रारूप है जिसमें स्किल और माइंडसेट की जरूरत होती है। उन्हें सफेद गेंद के प्रारूप के बजाय इस प्रारूप में उनके प्रदर्शन के लिए अधिक याद किया जाएगा। सिर्फ खिलाड़ी ही क्यों, अगर आप अंपायरों से पूछें तो वे टेस्ट मैच में अंपायरिंग करना चाहते हैं और एक टेस्ट अंपायर के रूप में पहचान बनाना चाहते हैं।

हां, ऐसे भी खिलाड़ी हैं जो विशेष रूप से अपने करियर के खत्म होने के कगार पर टेस्ट क्रिकेट में कड़ी मेहनत नहीं करने की जगह छोटे फार्मेट में खेलना चाहते हैं। तेज गेंदबाजों की जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वे टेस्ट मैच में एक दिन में 15 या उससे अधिक ओवर गेंदबाजी करने के बजाय चार ओवर की गेंदबाजी करना पसंद करते हैं। सफेद जर्सी में खिलाड़ियों की पहचान करने के लिए उनके पीछे सही नामों के साथ-साथ नंबरों को देखना भी अच्छा है।

नंबरों को जर्सी के पीछे इसलिए लाया गया है कि नए प्रशंसक अपने पंसदीदा खिलाड़ी की पहचान कर सकें। अक्सर मेहमान टीम के खिलाड़ियों की पहचान करने की आवश्यकता होती है क्योंकि वे घरेलू प्रशंसकों से परिचित नहीं होते हैं। टेस्ट क्रिकेट की बात करें तो, श्रेयस अय्यर को इतनी श्रद्धा के साथ कैप को चूमते हुए देखना दिल को छू लेने वाला था। यह बताता है कि भारत की टेस्ट कैप हासिल करना आधुनिक भारतीय क्रिकेटर के लिए भी चोटी का काम है। 303 अंक वाली वह कैप उनके लिए हमेशा खास रहेगी क्योंकि वह नंबर उन्हीं का है। उन्हें जो नई जर्सी मिली उस पर बीसीसीआइ के लोगो के नीचे अंकित नंबर होगा और वे केवल उन्हीं का रहेगा।

अगर इससे पहले इंग्लैंड दौरे की बात करें तो उसमें ध्यान देने वाली बात यह थी कि भारतीय टीम के स्वेटर का रंग पारंपरिक रूप से अतीत में इस्तेमाल होने वाले स्वेटर से अलग था। यह प्रायोजक ने किया है या बीसीसीआइ ने, यह स्पष्ट नहीं है। जब से भारत ने टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया है, तब से भारत की कैप एक जैसी ही रही है, इसलिए उम्मीद है कि टीम की अगली टेस्ट सीरीज खेलने से पहले जर्सी में इसे ठीक कर लिया जाएगा। साथ ही बीसीसीआइ के लिए लोगो और स्वेटर के रंग का पेटेंट कराना एक अच्छा विचार होगा ताकि कोई और उनका इस्तेमाल न कर सके।

एक बार फिर आप इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड के लोगो और जर्सी के रंगों को अपनी राष्ट्रीय टीमों के अलावा किसी और द्वारा इस्तेमाल करते नहीं पाएंगे। यही उन्हें बेशकीमती और प्रतिष्ठित बनाता है। आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जिस सम्मान के साथ अपनी बैगी ग्रीन कैप पहनते हैं, वह इसलिए है क्योंकि इस लोगो वाली कैप टेस्ट खिलाड़ी के अलावा किसी और के लिए उपलब्ध नहीं है। आप इसे दुकानों पर नहीं प्राप्त कर सकते हैं।

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