Future के साथ विवाद खत्‍म करना चाहती है Amazon, यह कार्रवाई करने की कही बात

Reliance Future deal अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन (Amazon) ने फ्यूचर समूह (future Group) के साथ जारी विवाद को खत्म करने के इरादे से भारतीय कंपनी से भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) में दर्ज अपनी शिकायत वापस लेने को कहा है।

Ashish DeepTue, 23 Nov 2021 11:10 AM (IST)
अमेजन और फ्यूचर समूह के अधिकारियों की करीब दो हफ्ते पहले एक मुलाकात भी हुई थी।

नई दिल्‍ली, पीटीआइ। अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन (Amazon) ने फ्यूचर समूह (future Group) के साथ जारी विवाद को खत्म करने के इरादे से भारतीय कंपनी से भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) में दर्ज अपनी शिकायत वापस लेने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक, फ्यूचर समूह और रिलायंस रिटेल के बीच घोषित खुदरा कारोबार सौदे का विरोध कर रही अमेजन इस विवाद से अब खुद को अलग करने का मन बना रही है लेकिन इसके लिए मुआवजा पर भी चर्चा चल रही है।

सूत्रों ने बताया कि विवाद सुलझाने के लिए अमेजन और फ्यूचर समूह के अधिकारियों की करीब दो हफ्ते पहले एक मुलाकात भी हुई थी लेकिन अमेजन ने यह साफ करने की कोशिश की है कि मुआवजा लेकर विवाद खत्म करने की बात गलत है।

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि बैठक में अमेजन ने अदालत के बाहर मामला निपटाने के संकेत भी दिए थे। लेकिन इसके लिए उसने फ्यूचर समूह से प्रतिस्पर्धा आयोग में दायर फेमा कानून उल्लंघन की शिकायत को वापस लेने की शर्त रखी।

अमेजन के इस मामले से अलग होने की स्थिति में उसे मुआवजा देने के मसले पर भी चर्चा की गई। अमेजन फ्यूचर समूह एवं रिलायंस रिटेल के बीच 24,713 करोड़ रुपये के सौदे का विरोध कर रही है।

फ्यूचर समूह ने इस बारे में प्रतिक्रिया देने के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया। वहीं अमेजन के प्रवक्ता ने कहा कि मुआवजा लेकर मामले से अलग होने की बात एक खास मकसद से कही जा रही है।

बता दें कि रिलायंस रिटेल और फ्यूचर रिटेल के मर्जर पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने बीते हफ्ते Future Retail के 24,713 करोड़ के सौदे पर 23 नवंबर तक रोक लगाई है। चीफ जस्टिस के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि इस सौदे को लेकर 23 नवंबर को क्रॉस-याचिकाओं पर सुनवाई होगी जिसे Amazon और Future Retail ने दाखिल किया है। चीफ जस्टिस ने फ्यूचर रिटेल से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को ही एक सहमति आदेश (कंसेंट ऑर्डर) पास किया था जिसके तहत कोई भी नियामकीय संस्था बिना सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के सौदे को मंजूरी नहीं देगी।

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