Corporate FD में मिलता है बैंक एफडी से अधिक रिटर्न, निवेश करने से पहले जान लें ये महत्वपूर्ण बातें

कॉरपोरेट एफडी में अधिक होता है जोखिम PC: Pixabay

आईसीआईसीआई होम फाइनेंस लिमिटेड (ICICI Home Finance Ltd) और एचडीएफसी लिमिटेड (HDFC Ltd) जैसी एएए रेटिंग वाली कॉरपोरेट एफडी बैंक एफडी की तुलना में एक से दो फीसद अधिक रिटर्न देती है।हालांकि कॉरपोरेट एफडी में थोड़ा जोखिम ज्यादा होता है।

Publish Date:Tue, 26 Jan 2021 03:15 PM (IST) Author: Pawan Jayaswal

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। कॉरपोरेट एफडी उन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है, जो बैंक एफडी से अधिक फिक्स्ड रिटर्न चाहते हैं। हालांकि, कॉरपोरेट एफडी में थोड़ा जोखिम ज्यादा होता है। भारत में फिक्स डिपॉजिट (FD) एक काफी सामान्य और अधिक लोकप्रिय निवेश विकल्प है। लेकिन पिछले कुछ महीने से बैंक एफडी पर ब्याज दरों में आ रही गिरावट के कारण लोग इसका विकल्प तलाश रहे हैं, ताकि बेहतर रिटर्न प्राप्त कर सकें। ऐसे निवेशक एएए रेटिंग वाले कॉरपोरेट फिक्स डिपॉजिट्स (Corporate FD) में भी निवेश शुरू कर सकते हैं। हालांकि, अगर आप एक औसत निवेशक हैं, तो आपको अधिक जोखिम होने के कारण कॉरपोरेट एफडी में निवेश की सलाह नहीं दी जाती है।

आईसीआईसीआई होम फाइनेंस लिमिटेड (ICICI Home Finance Ltd) और एचडीएफसी लिमिटेड (HDFC Ltd) जैसी एएए रेटिंग वाली कॉरपोरेट एफडी बैंक एफडी की तुलना में एक से दो फीसद अधिक रिटर्न देती है। एक निवेशक को कॉरपोरेट एफडी में निवेश करने से पहले तीन जोखिमों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए। आइए जानते हैं कि वे क्या हैं।

डिफॉल्ट होने का जोखिम

जहां बैंक एफडी में निवेश सुरक्षित समझा जाता है, तो वहीं कॉरपोरेट एफडी मे अधिक जोखिम होता है। यह निवेश उत्पाद न तो पूंजी की और न ही ब्याज भुगतान की सुरक्षा की गारंटी देता है। अगर कंपनी वित्तीय संकट का सामना करती है, तो एक निवेशक के रूप में आप अपने धन को खो भी सकते हैं।

प्री-मैच्योर निकासी

ज्यादातर कंपनी एफडी तीन महीने की लॉक-इन अवधि के साथ आती हैं, इस दौरान निवेशक निकासी नहीं कर सकते हैं। यहां तक कि लॉक-इन अवधि के पूरा होने के बाद भी प्री-मैच्योर निकासी का मतलब है पूरी एफडी को बंद करना। कॉरपोरेट एफडी में आशिंक निकासी की कोई सुविधा नहीं होती है। इसके अलावा, एक निवेशक को एफडी परिपक्व होने से पहले निकासी करने के पर कुछ ब्याज गंवाना पड़ेगा।

आयकर

कॉरपोरेट एफडी पर ब्याज निवेशक की आय में जुड़ता है और उस पर आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स कटता है। जो निवेशक उच्च टैक्स स्लैब में आते हैं, उनके लिए कॉरपोरेट एफडी आकर्षक नहीं रह पाती, क्योंकि टैक्स के बाद रिटर्न घट जाता है।

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