PPF Vs VPF Vs NPS Vs EPF: इन योजनाओं में निवेश कर तैयार करें बड़ा रिटायरमेंट फंड, कमाएं मोटा मुनाफा

रिटायरमेंट फंड के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर PC: Pixabay
Publish Date:Sat, 24 Oct 2020 11:16 AM (IST) Author: Pawan Jayaswal

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। रिटायरमेंट की उम्र के बाद हमारे पास आय का कोई नियमित साधन नहीं बचता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए रिटायरमेंट फंड बहुत जरूरी होता है। अगर आपने सही उम्र से रिटायरमेंट फंड के लिए बचत करना शुरू किया होगा, तो आप अपने जीवन के आखिरी पड़ाव को आनंद के साथ जी सकते हैं। हम जितनी कम उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करेंगे, उतना ही बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी लोकप्रिय निवेश योजनाओं के बारे में बताएंगे, जिनके माध्यम से एक अच्छा रिटायरमेंट फंड तैयार किया जा सकता है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड ( PPF )

पब्लिक प्रोविडेंट फंड अर्थात PPF रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए एक काफी अच्छा निवेश विकल्प है। पीपीएफ सरकार द्वारा समर्थित सेविंग स्कीम है। पीपीएफ की सबसे अच्छी बात यह है कि यह EEE स्टेटस के साथ आती है। अर्थात इस निवेश योजना में तीन स्तर पर ब्याज छूट का फायदा मिलता है। इस योजना में मैच्योरिटी राशि और ब्याज आय भी टैक्स फ्री होती है। पीपीएफ में निवेश करके निवेशक हर साल 1.5 लाख रुपये का आयकर बचा सकता है। पीपीएफ 15 साल की लॉक-इन अवधि के साथ आती है। इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। इस समय पीपीएफ पर ब्याज दर 7.1 फीसद है। यह एक जोखिम मुक्त निवेश विकल्प है। जो लोग एनपीएस या वीपीएफ जैसा लंबी अवधि वाला निवेश विकल्प नहीं चुनना चाहते, वे इस योजना में निवेश कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)

नेशनल पेंशन सिस्टम साल 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए लॉन्च किया गया था। बाद में साल 2009 में इसे सामान्य नागरियों के लिए भी ओपन कर दिया गया। एनपीएस में 18 से 60 साल तक की उम्र के लोग निवेश कर सकते हैं। देश के करीब सभी सरकारी और निजी बैंकों में जाकर इस योजना के अंतर्गत अकाउंट खुलवाया जा सकता है। एनपीएस का प्रबंध म्युचुअल फंड की तरह ही होता है। इससे एनपीएस से काफी अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है। इस योजना में निवेशक को अपनी नौकरी के दौरान हर महीने कुछ राशि जमा करानी होती है।

निवेशक रिटायरमेंट के बाद तैयार हुए फंड से एक हिस्सा निकाल सकते हैं और शेष रकम से नियमित आय के लिए एन्युटी ले सकते हैं। इस योजना में तीन तरह से निवेश होता है। पहला इक्विटी, दूसरा कॉरपोरेट बॉन्ड और तीसरा गवर्नमेंट सिक्युरिटीज। निवेशक को यहां निवेश निर्धारण करने के लिए दो विकल्प मिलते हैं। एसेट अलोकेशन और ऑटो च्वॉइस।

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)

बीस से अधिक कर्मचारियों वाली हर कंपनी को अपने कर्मचारियों के पीएफ के लिए योगदान देना होता है। कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में उसकी बेसिक सैलरी व डीए का 12 फीसद कर्मचारी द्वारा और इतना ही कंपनी द्वारा योगदान जमा कराया जाता है। ईपीएफ में पेंशन निधि भी होती है। यह कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद दी जाती है। इस समय ईपीएफ पर ब्याज दर 8.5 फीसद है। कर्मचारी कुछ विशेष परिस्थितियों में मैच्योरिटी अवधि से पहले भी अपने ईपीएफ अकाउंट से निकासी कर सकते हैं।

वीपीएफ (VPF)

वीपीएफ एक तरह से ईपीएफ का विस्तार है। अर्थात निवेशक वीपीएफ में निवेश तब ही सकते हैं, जब उनके पास ईपीएफ अकाउंट हो। ईपीएफ की तरह ही वीपीएफ में भी 8.5 फीसद ब्याज मिलता है। कर्मचारी अगर अपनी बेसिक सैलरी व डीए की 12 फीसद से अधिक राशि पीएफ फंड में जमा करता है, तो उसे स्वैच्छिक भविष्य निधि  (VPF) कहते हैं। कोई भी वेतनभोगी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 100 फीसद तक VPF अकाउंट में जमा करा सकता है। इस योजना के माध्यम से लंबे समय में मोटा रिटर्न कमाया जा सकता है।

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