शुरू हुआ ई-इनवॉइसिंग का तीसरा चरण, डिजिटल भविष्य के लिए तैयार हो रहे हैं भारतीय व्यवसाय

प्रतीकात्मक तस्वीर ( P C : Pexels )

ई-चालान सिस्टम के अंतर्गत चालान टैक्सपेयर के अकाउंटिंग और बिलिंग सिस्टम में ही विशेष प्रारूप में गुड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क (GSTN) द्वारा जनरेट किया गया है। इसके बाद यह डाटा इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल में एक JSON फाइल अपलोड करके भेजा जाता है।

Pawan JayaswalMon, 12 Apr 2021 05:04 PM (IST)

नई दिल्ली, अर्चित गुप्ता। आठ अप्रैल 2021 से सरकार ने 50 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्न ओवर वाले बिजनेस के लिए ई-चालान का फेज 3 अनिवार्य कर दिया है। देश के लाखों कारोबारों ने अब इस डिजिटल सुधार को अपनाया है और ऐसे में अब सरकार का उद्देश्य हर एक व्यवसाय को इसके दायरे में लाना है। सरल शब्दों में इलेक्ट्रॉनिक मशीन द्वारा पढ़ा जाने और उत्पन्न होने वाला चालान, ई-चालान कहलाता है। इसकी मदद से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) पोर्टल और ई-वे बिल सिस्टम जैसे गर्वमेंट सिस्टम को आपस में काम करने में सुविधा होती है।

ई-चालान सिस्टम के अंतर्गत, चालान टैक्सपेयर के अकाउंटिंग और बिलिंग सिस्टम में ही विशेष प्रारूप में गुड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क (GSTN) द्वारा जनरेट किया गया है। इसके बाद यह डाटा इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल में एक JSON फाइल अपलोड करके भेजा जाता है। यह अकाउंटिंग सिस्टम और एक्सेल बेस्ड ऑफलाइन टूल इस्तेमाल करके भी डायरेक्ट किया जा सकता है।

एक बार IRP को चालान का डाटा मिल गया, इसके बाद यह इनवॉइस नंबर, इनवॉइस के प्रकार, GSTIN, टैक्स अमाउंट इत्यादि जैसे विवरणों को मान्य कर देगा और अगर सबकुछ सही है तो IRP चालान के लिए एक यूनीक इनवॉइस रिफरेंस नंबर और क्यूआर कोड जनरेट करेगा। इसके बाद IRP चालान को डिजिटली साइन करेगा और इसे टैक्सपेयर को वापस भेज देगा। चालान के इस इलेक्ट्रोनिक फॉर्मेट में बदलने और IRP पर रजिस्टर्ड कराने को ई-इनवॉइस के तौर पर जाना जाता है।

आईआरपी आगे इस ई-चालान डेटा को जीएसटी और ई-वे बिल सिस्टम को भेजता है। GSTR-1 रिटर्न ई-चालान डेटा के साथ स्वतः भरा जाता है। अगर ई-चालान जनरेशन के समय ट्रांसपोर्टर की जानकारी दी जाती है तो ई-वे बिल भी ऑटो-जनरेट हो जाता है। इसलिए, ई-चालान भारत में अकाउंटिंग और टैक्स रिपोर्टिंग के लिए एक दूरगामी डिजिटल परिवर्तन है।

इसके फायदे यहीं खत्म नहीं होते। ई-चालान प्रक्रिया एक बहुआयामी सुधार है, जो बिना मैनुअल हस्तक्षेप किए डिजिटल भविष्य के लिए रास्ता बना रहा है। भारत में करदाताओं को अक्सर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करने, देनदारों से भुगतान प्राप्त करने, समय पर आपूर्तिकर्ताओं से चालान प्राप्त करने और जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ई-चालान इन मुद्दों को काफी हद तक हल करता है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि डेटा की ऑटो-पॉप्युलेशन और आईटीसी की वास्तविक समय पर उपलब्धता के चलते जीएसटी रिटर्न-फाइलिंग आसान हो जाएगी। व्यवसाय भी ग्राहकों से तेजी से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि ई-चालान को ऑटोमैटिक रिमाइंडर्स के साथ ईमेल और फॉलो-अप किया जा सकता है। एक और बड़ा लाभ क्रेडिट की आसान पहुंच है, जो कि एक पारदर्शी लेखा प्रणाली के निर्माण और समय में उधार को खत्म करने का परिणाम हो सकता है। बड़े संगठन भी ई-चालान को अपनाने वाले छोटे व्यवसायों के साथ काम करना चाहेंगे। ई-चालान के परिणामस्वरूप होने वाले इन सभी लाभों के साथ, टैक्सपेयर के पास अब कोई कारण नहीं है कि वे इसे न अपनाएं।

दूसरी तरफ सरकार के सामने भी नकली चालान, आईटीसी का गलत लाभ उठाना, टैक्स की अंडर रिपोर्टिंग और धोखाधड़ी जैसे बड़ी समस्याएं हैं। ई-चालान के साथ ये सभी समस्याएं सुलझ जाएंगी। टैक्सपेयर अब डेटा को गलत नहीं कह सकते क्योंकि हर एक आंकड़े को चैक किया जा सकता है। यदि कोई व्यवसाय जो ई-चालान के लिए योग्य है और फिर भी आईआरएन के बिना एक चालान बनाता है, तो वह चालान मान्य नहीं होगा। व्यवसाय भी अपने माल का परिवहन करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे। ई-चालान को अनिवार्य करके, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी धोखाधड़ी नहीं हो सकती है क्योंकि सभी लेनदेन रिपोर्ट किए जाते हैं।

ई-चालान, कर (टैक्स) पालन में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। यही कारण है कि सरकार इसके कार्यान्वयन में देरी नहीं कर रही है और न ही व्यवसायों को कोई छूट दे रही है। एक व्यवसाय जो ई-चालान का पालन नहीं करता है उसे प्रति चालान 10,000 रुपए तक का भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। सरकार इस सुधार को लागू करने के लिए बहुत सख्त है, इसलिए इसमें जुर्माना माफ होने की कोई संभावना नहीं होगी।

यदि आपका व्यवसाय ई-चालान के चरण तीन के अंतर्गत आता है, तो यह समय है जब आपके अपनी लेखांकन प्रणाली को ई-चालान के लिए तैयार कर लेना चाहिए। एक्सेल टूल का उपयोग करना बहुत समय लेने वाला हो सकता है और वहां मानवीय त्रुटियों का भी खतरा हो सकता है। इसलिए, स्वचालित ई-चालान जेनरेशन और कैसंलेशन का विकल्प चुनना बेहतर होगा। एक ऐसा विक्रेता चुनें जो यह सुविधा प्रदान करता हो, साथ ही स्वचालित अपडेट और 24x7 ग्राहक सहायता भी देता। यदि आपका सेवा प्रदाता जीएसटी रिटर्न और ई-वे बिल के साथ इनबिल्ट रिकॉन्सिलेशंस प्रदान करता है, तो यह एक अतिरिक्त लाभ होगा। ज्यादा इंतजार न करें। यह डिजिटल पर जाने का वक्त है।

(लेखक क्लीयर टैक्स के संस्थापक एवं चीफ एक्सीक्यूटिव ऑफिसर हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

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