Share Market Investment Tips: कोरोना काल में निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Share Market Investment Tips P C : Pexels

सच पूछिए तो शेयर बाजार में निवेश के लिए हर समय सही समय है यदि शेयरों का चुनाव सही हो और निवेश का नजरिया लम्बा हो। हमने देखा है कि इक्विटी एक ऐसा एसेट क्लास है जो लम्बे समय में अच्छे रिटर्न दिलाने की क्षमता रखता है

Pawan JayaswalWed, 21 Apr 2021 01:36 PM (IST)

नई दिल्ली, पंकज मठपाल। कोरोना की दूसरी लहर ने कहर मचा रखा है और कई शहरों मे तो लॉक डाउन लगाने तक की नौबत आ गयी है। कई नकारात्मक खबरें सुनने को मिल रही हैं और ऐसे में मन में यही सवाल उठता है कि क्या यह सही समय है, निवेश के लिए और विशेषकर शेयर बाजार में निवेश के लिए जहां उतार चड़ाव की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं।

लेकिन आपको याद होगा, यही विचार पिछले साल लगभग इसी समय पर हम सबके मन में था। कोरोना की पहली लहर के बाद सरकार ने जो कदम उठाये, वो काफी हद तक कारगर साबित हुए। उससे हमारी डूबती हुई अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लौटने में मदद मिली और शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली।

वहीं, जब अब कोरोना की दूसरी लहर ने कहर मचाया हुआ है, वैक्सीन की उपलब्धता एक रोशनी की किरण बन कर आई है। सरकार का यह फैसला कि एक मई से 18 वर्ष से अधिक के सभी व्यक्तियों को कोरोना की वैक्सीन लगायी जा सकती है, निवेशको के मन मे काफी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

ऐसे मे शेयर बाजार में निवेश को लेकर मेरा नजरिया भी सकरात्मक है। सच पूछिए तो शेयर बाजार में निवेश के लिए हर समय सही समय है, यदि शेयरों का चुनाव सही हो और निवेश का नजरिया लम्बा हो। हमने देखा है कि इक्विटी एक ऐसा एसेट क्लास है, जो लम्बे समय में अच्छे रिटर्न दिलाने की क्षमता रखता है और पूँजी जुटाने में मददगार साबित होता है. 

मल्टी कैप फ़ंड का महत्व 

सभी इक्विटी शेयर एक जैसे नहीं होते। सभी शेयरों का प्रदर्शन भी एक समय पर एक सामान नहीं होता। कंपनियों के आकार के आधार पर, उनके इक्विटी शेयरों को लार्ज कैप, मिड कैप या स्माल कैप के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। विश्लेषण से पता चलता है कि लार्ज कैप शेयर अक्सर कम जोखिम के साथ धीमी गति से बढ़ते हैं, जबकि स्माल कैप मे अधिक जोखिम के साथ लंबे वक्त मे बेहतर रिटर्न दिलाने की क्षमता अधिक होती है।

एक सफल निवेश पोर्टफोलियो के लिए, स्थिरता और विकास का मिश्रण बहुत महत्वपूर्ण है। यह कहना आसान है कि निवेशकों को उसी प्रकार के मार्केट कैप वाले शेयरों मे निवेश करना चाहिए, जिनसे उस वक्त पर बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद हो, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह मुश्किल हो जाता है। और ऐसे मे एक डाइवर्सिफाइड मल्टी कैप फंड अच्छा विकल्प हो सकता है। आज के मल्टी कैप पहले के मुक़ाबले काफी अलग हैं। पहले मल्टी कैप फ़ंड का निवेश लार्ज, मिड और स्माल सभी तरह के शेयरों मे होता तो था, लेकिन यह तय नहीं था की किस श्रेणी के शेयरों मे न्यूनतम किस मात्रा मे निवेश करना है।

लेकिन पिछले साल सितम्बर मे सेबी ने नए दिशा निर्देश जारी किए, जिसके अनुसार किसी भी मल्टी कैप फ़ंड का निवेश तीनों श्रेणी के शेयरों में कम से कम 25-25 फीसद आवश्यक होगा। शेष 25 फीसद को फ़ंड मैनेजर अपनी बुद्धिमता और परिस्थिति के अनुसार निवेश कर सकते हैं। लेकिन उस वक्त अधिकतर मल्टी कैप फ़ंड का झुकाव लार्ज कैप की तरफ था। उसके बाद जैसे ही नवंबर मे सेबी ने फ्लेक्सि कैप कटेगरी लॉंच की, अधिकतर म्यूचुअल फ़ंड कंपनियों ने अपनी मल्टी कैप फ़ंड को फ्लेक्सि कैप मे तब्दील कर दिया। मल्टी कैप फ़ंड का निवेश के नजरिए से अपना एक अलग महत्व है, क्योंकि यह बात तय है निवेशक का पैसा पूरी तरह से डाइवेर्सिफाइड पोर्टफोलियो मे निवेशित है।  

फ़ंड की उपयुक्तता

चूंकि मल्टी कैप फंड विभिन्न श्रेणी के शेयरों मे पूंजी को आवंटित करते हैं, ऐसे में ये फ़ंड लंबी अवधि मे आकर्षक रिटर्न दिलाने की क्षमता रखते हैं। निवेशकों को अपने लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के उद्देश्य से इस केटेगरी के फ़ंड मे निवेश करना चाहिए। नए निवेशक विशेष रूप से जो एक छोटी राशि के साथ एक इक्विटी फंड में एक मुश्त या एसआईपी शुरू करना चाहते हैं, वे भी एक मल्टी कैप फंड पर भी विचार कर सकते हैं, क्योंकि उनहें एक ही स्कीम में लार्ज, मिड और स्माल तीनों तरह के म्यूचुअल फ़ंड का लाभ मिल जाएगा। 

चूंकि इस श्रेणी में कुछ मुट्ठी भर योजनाएं हैं, इसलिए अधिक म्यूचुअल फ़ंड कंपनियों के पास मल्टी कैप फ़ंड लॉन्च करने की गुंजाइश है। हाल ही मे आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड ने भी मल्टी कैप फंड का एनएफओ लॉन्च किया है। यह एनएफओ 3 मई 2021 तक खुला रहेगा। स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट (एसाइडी) के अनुसार स्कीम में न्यूनतम 500 रुपए से निवेश की शुरुआत की जा सकती हैं।

फ़ंड मैनेजर की कोशिश रहेगी कि आर्थिक तौर पर मजबूत कंपनियों के शेयरो मे निवेश किया जाये, ताकि लंबी अवधी मे निवेशकों को अच्छा लाभ मिल सके। ऐसा देखा गया है कि एक आर्थिक तौर पर मजबूत कंपनी बुरे हालातों मे अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है, जबकि एक कमजोर व्यवसाय अच्छे समय पर भी नाकाम रह जाता है। इसलिए निवेश की इस रणनीति मे पूरे सैक्टर को एक नजर से देखने के बजाए एक कंपनी के आर्थिक स्थिति और बिजनेस मॉडल पर अधिक ध्यान दिया जाता है। अच्छा जोखिम सहने की क्षमता रखने वाले निवेशक पांच साल या उससे अधिक के नजरिए से इस योजना में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं।

(लेखक ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.