कई सारे Mutual Funds में एकसाथ Investment से मिलता है ज्यादा रिटर्न या होता है घाटा, एक्सपर्ट से जानिए

Mutual Funds लाइफ के विभिन्न लक्ष्यों को हासिल करने के वास्ते धन जुटाने का एक प्रमुख इंस्ट्रुमेंट बन चुका है। आपके पोर्टफोलियो में विविधता लाने के साथ-साथ ये आपको कम अवधि और लंबी अवधि के कई तरह के लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होते हैं।

Ankit KumarFri, 18 Jun 2021 05:26 PM (IST)
कई बार निवेशकों को अपने Mutual Fund इंवेस्टमेंट से मन मुताबिक रिटर्न हासिल नहीं हो पाता है।

नई दिल्ली, राहुल जैन। आज के समय में Mutual Funds लाइफ के विभिन्न लक्ष्यों को हासिल करने के वास्ते धन जुटाने का एक प्रमुख इंस्ट्रुमेंट बन चुका है। आपके पोर्टफोलियो में विविधता लाने के साथ-साथ ये आपको कम अवधि और लंबी अवधि के कई तरह के लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होते हैं। हालांकि, कई बार निवेशकों को अपने Mutual Fund इंवेस्टमेंट से मन मुताबिक रिटर्न हासिल नहीं हो पाता है। कई फंड को होल्ड करना इसकी सबसे बड़ी वजहों में से एक है।

कई फंड होल्ड करने से जुड़ी समस्याएं

इंवेस्टर्स में यह बहुत कॉमन है कि वे अपने पोर्टफोलियो में एक तरह के कई फंड को शामिल कर लेते हैं। वे अपने पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन के लिए ऐसा करते हैं। वह इस चीज को मानकर ऐसा करते हैं कि यह जोखिम को कम करेगा और रिटर्न्स को बढ़ा देगा। हालांकि, अधिकतर मामलों में इसके विपरीत परिणाम देखने को मिलता है।

आप जब एक जैसे नेचर वाले कई फंड्स रखते हैं, जिनके कोर फंडामेंट्ल्स एक जैसे होते हैं तो ये रिटर्न को कम कर देते हैं। नफा-नुकसान सब बराबर हो जाता है। बहुत अच्छा प्रदर्शन करने वाली स्कीम से होना वाला फायदा और कमतर प्रदर्शन वाली स्कीम से होने वाला घाटा कॉम्प्रोमाइज हो जाता है।

साथ-ही-साथ आपने जो इक्विटी फंड ले रखा है, वह कम-से-कम 50-60 स्टॉक में निवेश करता है। इस तरह अगर आप 8 से 10 इक्विटी फंड रखते हैं तो आप एक साथ 400 से 600 स्टॉक या उससे भी ज्यादा शेयरों में निवेश करते हैं। ऐसे परिदृश्य में आपका पोर्टफोलियो ट्रैकर फंड की तरह काम करता है। इस तरह अगर आप पूरे मार्केट में एकसाथ निवेश करते हैं तो अल्फा (बढ़िया रिटर्न) हासिल करना मुश्किल हो जाता है।

अगर आफ ऐसा करना चाहते हैं तो इंडेक्स फंड में निवेश ज्यादा बेहतर विकल्प है। आप ना सिर्फ लागत में बचत कर लेते हैं बल्कि फंड के अच्छा प्रदर्शन नहीं करने पर आपको शॉक भी नहीं झेलना पड़ता है।

मॉनिटर करने में पेश आती है दिक्कत

जब आप अपने पोर्टफोलियो में कई फंड्स रखते हैं तो आपको अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो इसे मॉनिटर करना खासा मुश्किल हो जाता है। इसके लिए आपको जरूरत से ज्यादा समय चाहिए होता है और कई बार तो ऐसा हो सकता है कि आप पूरे साल में एक बार भी अपने पोर्टफोलियो को रिव्यू नहीं कर पाते हैं।

अगर आफ इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि हर कम्पोनेंट किस प्रकार काम कर रहा है तो कई बार बुरे प्रदर्शन पर आपकी निगाह नहीं जा पाती है और रिटर्न में भी कमी आ जाती है।

ऐसा करने का रास्ता

ऐसे में पोर्टफोलियो में कई फंड को होल्ड किए बगैर डाइवर्सिफिकेशन के सही तौर-तरीके पर गौर करना बहुत जरूरी है। साथ-ही-साथ खराब प्रदर्शन करने वालों को चिह्नित करने और उसे हटाने के लिए आपको समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को नए सिरे से बैलेंस करना चाहिए।

वास्तव में सही एसेट एलोकेशन न केवल आपको ओवरबोर्ड से रोकेगा, बल्कि बाजार में गिरावट की स्थिति में लाभ को कम होने से भी रोकेगा। इसे मार्च 2020 के उदाहरण से समझते हैं, जब बाजार में जब करेक्शन देखने को मिल रहा था। साथ ही इक्विटी फंड में बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिल रही थी। ऐसे अनिश्चितता वाले काल में जिन लोगों के पोर्टफोलियो में सोना और डेट भी थे, उनमें लचीलता देखने को मिली।

कितने फंड्स होल्ड करने चाहिए

ऐसे में सवाल ये है कि आपको अपने पोर्टफोलियो में कितने फंड्स होल्ड करने चाहिए? ऐसे में जब हम इक्विटी फंड्स की बात करते हैं तो निवेशकों के पास कई तरह के विकल्प होते हैं। लार्ज-कैप, मिड-कैप, मल्टी-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में आफको एक चुनना होता है।

हालांकि, किसी भी समय में आपके लिए तीन या चार फंड्स पर्याप्त हैं। कुछ मल्टी-कैप फंड्स के साथ-साथ एक लार्ज और मिड-कैप फंड से आपका काम हो जाएगा। अगर आप ज्यादा जोखिम लेने की स्थित में हैं तो आप एक स्मॉल कैप फंड भी सेलेक्ट कर सकते हैं। इससे ज्यादा की जरूरत नहीं है।

साथ ही साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो फंड आप चुनते हैं वे एक ही स्टॉक में निवेश ना कर रहे हो। इसकी वजह यह है कि ओवरलैपिंग से आपको कोई फायदा नहीं होने वाला है। डेट फंड की स्थिति में आपके पोर्टफोलियो में लिक्विड फंड्स भी होने चाहिए। इससे इमरजेंसी फंड बनाने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

इस तरह देख सकते हैं कि अपने पोर्टफोलियो में फंड्स की संख्या को सीमित कर आप डाइवर्सिफिकेशन हासिल कर सकते हैं। साथ ही अधिकतम रिटर्न हासिल कर सकते हैं। आपकी संपत्ति में इजाफा करने के लिए तीन से चार फंड्स काफी हैं। हालांकि, यहां आकार से बहुत अधिक मतलब रह नहीं जाता है।

ओवरलैपिंग से बचने के लिए फंड्स पोर्टफोलियो का विश्लेषण ध्यान से करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए आपको अपने फंड्स के कम्पोजिशन पर गौर करने की जरूरत होती है। ओवरलैप का आकलन करने के लिए आप ऑनलाइन टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

(लेखक Edelweiss Personal Wealth के प्रमुख हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

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