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Investment Tips: निवेशकों की विफलता की कहानी पर भी गौर करना जरूरी, मिलती है आगे की राह

नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। सफलता की चाह रखने वाला हर इंसान अतीत में सफल हुए लोगों के बारे में जानना चाहता है, उनकी सफलता के पैटर्न पर चलते हुए उसे दोहराना चाहता है। निवेशकों के मामले में भी यही सच है। वे सिर्फ सफलता की कहानियां पढ़ना और सुनना चाहते हैं। वे सिर्फ यह जानने में दिलचस्पी रखते हैं कि बचत या निवेश में क्या करना चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि सफलता के साथ-साथ अगर विफलता का भी विश्लेषण किया जाए और समझने की कोशिश की जाए कि कोई निवेश सफल क्यों नहीं हुआ, तो निवेशक के लिए ज्यादा कारगर पहलू सामने आ सकते हैं। सफलता की कहानियां जरूरी पढ़नी चाहिए, उससे ऊर्जा मिलती है। लेकिन विफलता की कहानी भी उसी तन्मयता से पढ़नी चाहिए, क्योंकि उससे सबक मिलती है। 

वैल्यू रिसर्च पिछले दो दशकों से कई वेबसाइट और मैग्जीन प्रकाशित कर रही है। मैंने गौर किया है कि नेगेटिव आर्टिकल पाठकों में लोकप्रिय नहीं हैं। आप शायद जानना चाहें कि नेगेटिव आर्टिकल क्या है। नेगेटिव आर्टिकल या विश्लेषण यह बताता है कि बचत या निवेश में क्या बुरा है, यह बताता है कि आप क्या न करें। एक पॉजिटिव आर्टिकल आपको बताता है कि क्या अच्छा है, आपको समझाता है कि क्या करना चाहिए। एक पॉजिटिव आर्टिकल रकम बनाने के बारे में होता है। वहीं नेगेटिव आर्टिकल रकम न गंवाने के बारे में होता है। आमतौर पर इक्विटी निवेशक नेगेटिव आर्टिकल्स नहीं पढ़ना चाहते हैं। वे बहुत आशावादी होते हैं।  

आपको लग सकता है कि इक्विटी में निवेश से निवेशक आशावादी बन जाते हैं और सब अच्छा-अच्छा देखने लगते हैं। यह सच नहीं है। हकीकत इसके ठीक विपरीत है। असल में होता यह है कि स्वाभाविक तौर पर आशावादी लोग ही इक्विटी निवेशक बनते हैं। इक्विटी में निवेश शुरू करने के लिए जरूरी है कि आपमें इस बात को लेकर मजबूत भरोसा होना चाहिए कि वर्तमान के मुकाबले भविष्य बेहतर होगा। अब आप समझ गए होंगे कि इक्विटी निवेशक नेगेटिव स्टोरीज पढ़ना क्यों नहीं पसंद करते हैं। अगर मुझे रीडरशिप बढ़ाने और सबको खुश करने की चिंता होती तो वैल्यू रिसर्च भी सिर्फ आशावादी लेखों पर ही फोकस करती। दुर्भाग्य से निवेश इससे कहीं ज्यादा जटिल है। गलतियां या खराब फैसले आपके निवेश की वैल्यू को बहुत तेजी से नुकसान पहुंचा सकते हैं। और ऐसा भी नहीं कि अच्छे फैसलों से इस नुकसान की भरपाई हो जाए। यह भरपाई लगभग मुश्किल होती है।  

बहुत से ऐसे स्टॉक्स ऐसे हैं जिनकी वैल्यू गिरकर 10वें हिस्से के बराबर रह गई है। अब अगर किसी ने इन फंड्स में निवेश किया था और गलत भरोसे या आशावाद की वजह से निवेश को बनाए हुए है तो इसे बैलेंस करने के लिए 10 गुना रकम निवेश करना होगा। कहने की जरूरत नहीं कि यह 10 गुना निवेश कोई आसान काम नहीं है, या कहें तो करीब-करीब मुश्किल है। बल्कि ऐसे फंड्स में तो निवेश बनाए रखना भी मुश्किल है। तो यह साफ हो जाता है कि अगर आप मुनाफे और सुरक्षा के लिए निवेश करना चाहते हैं तो 'आप अपनी रकम के साथ क्या करें' से ज्यादा अहम है कि 'आप अपनी रकम के साथ क्या न करें'।  

अब सवाल यह है कि आप गलतियों से कैसे बचेंगे। इसके लिए सबसे पहले आप को नेगेटिव स्टोरीज से बचने की आदत से उबरना होगा और असफलता की उन बड़ी स्टोरीज को पढ़ना होगा, जो काफी चर्चित रही हैं। हो सकता है कि कुछ कंपनियां खराब प्रबंधन का शिकार हो गई हों। कुछ कंपनियों के प्रबंधन ने फर्जीवाड़ा किया और कुछ कंपनियां बाहरी वजहों से धराशायी हो गई हों। एक निवेशक और निवेश विश्लेषक के तौर पर हमारा काम इसमें निहित पैटर्न को देखना है और इस पर गौर करना है कि यह पैटर्न कहीं और भी तो नहीं है। हमें ऐसे पैटर्न को चेतावनी के संकेत के तौर पर लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम जो स्टॉक खरीदने जा रहे हैं। उनमें यह पैटर्न न हो।  

ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ इस सिद्धांत के बारे में लिखते ही हैं। यह हमारी विश्लेषण प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। अपनी प्रीमियम इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी सर्विस वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइजर में स्टॉक सेलेक्ट करने के तौर-तरीकों में इसे एक अहम फैक्टर बनाया है। हमारी एनालिस्ट टीम ने नेगेटिव बातों की एक लिस्ट बनाई है। और हम यह सुनिश्चित करते हैं जिन स्टॉक्स को खरीदने या उनमें निवेश की अनुशंसा हम करते हैं, उनमें कोई भी नेगेटिव बात नहीं होनी चाहिए। भले ही स्टॉक कितना भी अच्छा क्यों न दिख रहा हो। अगर इसमें कोई भी नेगेटिव बात दिखती है तो हम बिना कुछ सोचे उसे तुरंत रिजेक्ट कर देते हैं। हालांकि इक्विटी निवेश में यही काफी नहीं है। कंपनियां खुद को बर्बाद करने के नए तरीके निकाल लेंगी। प्रमोटर और प्रबंधन नए तरह के अपराध करने के तरीके निकाल लेंगे। ऐसी नेगेटिव चीजों से आपको एक ही चीज बचा सकती है। वह है डायवर्सिफिकेशन यानी स्टॉक्स का विविधीकरण। इसे और सरल शब्दों में कहें तो अलग-अलग सेक्टर के स्टॉक्स में निवेश करना। लंबे इन्वेस्टिंग कैरियर में हर किसी को रकम बर्बाद करने वाले कुछ स्टॉक मिल ही जाएंगे। मेरा व्यक्तिगत अनुभव भी ऐसा ही है। आपके पास एक ही डिफेंस है कि आप निवेश को डायवर्सिफाई करें, जिससे कि आप नुकसान को झेल पाएं और इससे सीख लेकर आगे बढ़ सकें।

(लेखक वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं। ये लेखक के निजी विचार हैं।)

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