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कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग का फायदा बढ़ाने की तैयारी, खाद्यान्न, बागवानी उत्पादों के साथ पशुधन और मत्स्य क्षेत्र पर जोर

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोविड-19 के इस दौर में कृषि उत्पादों की निर्यात मांग को पूरा करने और उसे बनाए रखने की तैयारियों में सरकार जुट गई है। खाद्यान्न के साथ बागवानी, पशुधन और मत्स्य उत्पादों की निर्यात बढ़ाने को लेकर संबंधित मंत्रालयों ने साझा रणनीति बनायी है। इससे कृषि निर्यात को जहां दोगुना करने में मदद मिलेगी, वहीं किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। कोरोना काल के दौरान ही घरेलू निर्यातकों को आठ प्रमुख देशों से 35 कृषि जिंसों की मांग आई है।

लाकडाउन के दौरान ही कृषि मंत्रालय ने निर्यातकों की मुश्किलों को सुलझाने के लिए उनसे विस्तृत चर्चा कर ली थी। इसके बाद मत्स्य व पशुधन मंत्रालय ने इन मुद्दों पर गंभीर मंत्रणा पूरी कर ली है। वैश्विक स्तर पर खाद्य उत्पादों की निकल रही मांग के मद्देनजर घरेलू निर्यातकों ने भी कमर कस ली है। चीनी और चावल का निर्यात तो पहले से ही हो रहा है, जिसमें और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए संबंधित मंत्रालयों के बीच साझा रणनीति बनाने की सलाह दी थी। इसी दौरान कृषि निर्यात नीति-2018 तैयार की गई थी, जिसके तहत 2022 तक कृषि निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया। अमेरिका, कनाडा, चिली, इक्वाडोर, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, ईरान व ताईवान ने भारतीय कृषि उत्पादों में अपनी रुचि दिखाई है।

कोविड-19 के प्रकोप से पहले ही स्थानीय स्तर से कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खेप भेजी गई थी। इसमें बनारस और गुवाहाटी प्रमुख हैं। कृषि मंत्रालय और एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट एक्सपोर्ट डवलपमेंट अथारिटी (एपीडा) ने संयुक्त रूप से देश के 70 जिलों को 'वन डिस्टि्रक्ट वन प्रॉडक्ट' के लिए चिन्हित किया है। निर्यात मांग के आधार पर यहां के उत्पादों को चयनित किया गया है।

प्रोसेस्ड मीट और मत्स्य के क्षेत्र में निर्यात की भी पर्याप्त संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में मौजूदा निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य पूरा करने के लिए इसके लिए अलग मंत्रालय का गठन किया गया है।

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