आने वाली तिमाहियों में GDP में होगी तेज वृद्धि, अगस्त के 8.3 फीसद के मुकाबले सितंबर में बेरोजगारी दर 6.9 फीसद हुई

पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआइ) के चेयरमैन प्रदीप मुल्तानी ने कहा हाल के महीनों में प्रमुख आर्थिक और कारोबारी संकेत में तेजी से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था गति पकड़ रही है और आने वाली तिमाहियों में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है।

NiteshMon, 25 Oct 2021 07:53 AM (IST)
There will be a sharp increase in GDP in the coming quarters

नई दिल्ली, पीटीआइ। अर्थव्यवस्था की रफ्तार के जोर पकड़ने के साथ ही आने वाली तिमाहियों में जीडीपी में तेज वृद्धि की उम्मीद है। यह बात उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआइ ने रविवार को कही। संगठन जिन 12 प्रमुख आर्थिक और कारोबारी संकेतों की निगरानी करता है, उनमें से नौ में सितंबर, 2021 में तेज वृद्धि दिखाई दी है। जबकि अगस्त के महीने में ऐसा सिर्फ छह संकेतों में हुआ था।

पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआइ) के चेयरमैन प्रदीप मुल्तानी ने कहा, 'हाल के महीनों में प्रमुख आर्थिक और कारोबारी संकेत में तेजी से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था गति पकड़ रही है और आने वाली तिमाहियों में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है।'

हालांकि उन्होंने सुझाव दिया कि इस समय देश में खपत और निजी निवेश को समर्थन देने के लिए कच्चे माल की ऊंची कीमतों और कच्चे माल की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने की जरूरत है। उद्योग संगठन ने कहा कि जीएसटी कलेक्शन, शेयर बाजार, यूपीआइ लेनदेन, निर्यात, विनिमय दर, विदेशी मुद्रा भंडार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, थोक मूल्य सूचकांक, महंगाई दर और बेरोजगारी दर ने अगस्त 2021 की तुलना में सितंबर, 2021 में लगातार सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है।

इसके अलावा बेरोजगारी की स्थिति सितंबर, 2021 में सुधकर 6.9 प्रतिशत हो गई, जो उससे पिछले महीने में 8.3 प्रतिशत थी। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की अप्रैल-जून तिमाही में 24.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इसका कारण, पिछले साल अप्रैल-मई के दौरान कोरोना की रोकथाम के लिए देशव्यापी 'लॉकडाउन' लगाया जाना था।

हाल ही में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा जताया था कि भारत 2024-25 तक पांच ट्रिलियन डालर और 2030 तक 10 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। आर्थिक वृद्धि की गति पर उन्होंने कहा था कि पेट्रोल की खपत कोरोना पूर्व स्तरों की तुलना में 16 प्रतिशत और डीजल की खपत 10-12 प्रतिशत अधिक है।

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