विकास दर पर फिर बेकाबू कोरोना का साया, मांग में कमी से औद्योगिक उत्पादन पर असर दिखने की आशंका

प्रतीकात्मक तस्वीर( P C : Flickr )

देश के औद्योगिक उत्पादन और जीडीपी में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों की 30 फीसद से अधिक हिस्सेदारी है। इनमें मुख्य रूप से महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ पंजाब दिल्ली व हरियाणा शामिल हैं। देश के औद्योगिक उत्पादन में अकेले महाराष्ट्र का योगदान 13 फीसद का है।

Pawan JayaswalTue, 13 Apr 2021 07:52 PM (IST)

नई दिल्ली, राजीव कुमार। औद्योगिक उत्पादन और जीडीपी में अहम योगदान रखने वाले राज्यों में कोरोना संक्रमण की बेकाबू गति से विकास दर के फिर प्रभावित होने की आशंका मजबूत हो रही है। एचडीएफसी बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून, 2021 के लिए 19.5 फीसद विकास दर का अनुमान लगाया था, जो मौजूदा हालात में हासिल होना मुश्किल सा दिख रहा है। उद्योग संगठन भी कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए अब पहली तिमाही की विकास दर पर असर पड़ने की बात कहने लगे हैं।

वैश्विक वित्तीय फर्म नोमुरा ने गत सोमवार को चालू वित्त वर्ष 2021-22 की जीडीपी दर में घटाते हुए 12.6 फीसद कर दिया है। पहले नोमुरा ने वित्त वर्ष 2021-22 में 13.5 फीसद की विकास दर का अनुमान लगाया था, जिसे इसी सप्ताह सोमवार को घटाकर 12.6 फीसद कर दिया गया है।

देश के औद्योगिक उत्पादन और जीडीपी में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों की 30 फीसद से अधिक हिस्सेदारी है। इनमें मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, दिल्ली व हरियाणा शामिल हैं। देश के औद्योगिक उत्पादन में अकेले महाराष्ट्र का योगदान 13 फीसद का है। वहीं, निर्यात में अकेले गुजरात की हिस्सेदारी 20 फीसद है।

इन राज्यों के कई शहरों में रात के लॉकडाउन और देश भर में एक बार फिर से कोरोना की वजह से नकारात्मक माहौल बनने से गैर जरूरी चीजों की बिक्री प्रभावित होने लगी है। इससे औद्योगिक उत्पादन कम होगा जो रोजगार को प्रभावित करेगा। राज्यों के बीच मोबिलिटी में कमी आई है। यही वजह है कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के श्रमिक फिर से धीरे-धीरे अपने मूल राज्य की ओर लौटने लगे हैं। सीएमआईई की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में बेरोजगारी दर बढ़कर सात फीसद से अधिक हो गई।

एचडीएफसी बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता का कहना है कि कोरोना वायरस की गंभीरता और इस वजह से होने वाले विभिन्न प्रकार के लॉकडाउन पहली तिमाही पर होने वाले असर को निर्धारित करेंगे। हमने 19.5 फीसद की विकास दर का जो अनुमान लगाया है, उसके नीचे जाने की आशंका है।

उद्योग संगठन पीएचडी चेंबर के प्रेसिडेंट संजय अग्रवाल के मुताबिक संगठन पहले चालू वित्त वर्ष की विकास दर को लेकर काफी आशान्वित था, लेकिन कोरोना की तेजी से बढ़ती दर ने चिंता बढ़ा दी है। केंद्र व अधिकतर राज्य सरकारें भी पूरी तरह से लॉकडाउन के पक्ष में नहीं है, लेकिन आंशिक लॉकडाउन का भी असर तो दिखेगा।

रियल एस्टेट जगत के संगठन नारेडको के नेशनल प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी कहते हैं, कोरोना की बढ़ती दूसरी लहर के बीच धीरे-धीरे पलायन के रुख को महसूस किया जा रहा है, लेकिन सभी राज्य और सभी औद्योगिक सेक्टर में एक जैसी स्थिति नहीं है। अभी तक की स्थिति के मुताबिक बिजली, होटल, रेस्टोरेंट जैसे सेक्टर में काम करने वाले लौटने का मन बना रहे है। जहां तक निर्माण क्षेत्र का सवाल है तो प्रवासी श्रमिकों का निर्माण स्थल पर ही पूरा ख्याल रखा जा रहा है।

जीडीपी में राज्यों का योगदान

महाराष्ट्र: 13.88 फीसद

गुजरात: 7.92 फीसद

मध्य प्रदेश: 4.27 फीसद

दिल्ली: 4.08 फीसद

पंजाब: 2.77 फीसद

छत्तीसगढ़: 1.60 फीसद

हरियाणा: 3.32 फीसद

(आंकड़े वित्त वर्ष 2018-19 के, स्रोत : सांख्यिकी मंत्रालय)

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