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हरे निशान में बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स 95 अंक चढ़ा, निफ्टी 11,600 के ऊपर बंद

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। बुधवार को शेयर बाजार उछाल के साथ बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 94.99 अंक चढ़कर 39,058.83 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 15.75 बढ़कर 11,604.10 पर बंद हुआ। निफ्टी के 50 शेयरों में से 30 हरे निशान और 20 लाल निशान में बंद हुए। बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। सूचना एवं प्रौद्योगिकी और वाहन कंपनियों के शेयरों में लाभ से शेयर बाजार में बढ़त आई।

सेंसेक्स की कंपनियों में सबसे अधिक शेयर एचसीएल टेक (2.93 फीसद) का चढ़ा। मारुति सुजुकी, एसबीआई, एचडीएफसी, हीरो मोटोकॉर्प और इन्फोसिस के शेयर 2.55 फीसद तक लाभ में रहे। वहीं दूसरी ओर भारती एयरटेल, वेदांता, ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक बैंक और येस बैंक के शेयर 3.59 फीसद तक नीचे आए। 

अन्य एशियाई बाजारों की बात करें तो चीन के शंघाई, हांगकांग के हैंगसेंग, जापान के टोक्यो और दक्षिण कोरिया के सियोल मिलेजुले रुख के साथ बंद हुए। शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजारों में भी गिरावट रहा। इस बीच, अंतर बैंक विदेशी विनिमय बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान रुपया मामूली बढ़त के साथ 70.92 प्रति डॉलर पर चल रहा था। वहीं ब्रेंट कच्चा तेल वायदा 0.85 फीसद टूटकर 59.19 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेस के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक बैंकिंग और आइटी सेक्टर के लार्ज कैप में खरीद के चलते शेयर बाजार अधिकतर समय सकारात्मक रहे। इसके अलावा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के कारण ज्यादातर कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि हुई है। बीएसई में ऑटो, आइटी, पावर, एफएमसीजी, टेक और फाइनेंस सेक्टर के शेयरों में 1.18 परसेंट तक की तेजी देखी गई। 

इन्फोसिस के शेयरों में हुआ सुधार

बुधवार को आइटी कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में एक परसेंट का सुधार दर्ज किया गया। बुधवार को बीएसई में कंपनी के शेयर 1.16 परसेंट सुधार के साथ 650.75 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर बंद हुए। वहीं एनएसई में इसके शेयरों का बंद भाव एक परसेंट सुधार के साथ 650.35 रुपये था। इससे पहले मंगलवार को कंपनी के शेयरों में 16 परसेंट की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। कंपनी ने एक ही दिन में करीब 53 हजार करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण गंवा दिया था। कंपनी के शेयरों में यह छह वर्ष की सबसे बड़ी गिरावट थी।

 

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