प्रवासी मजदूरों के घर लौटने से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र और दिल्ली के छोटे कारोबार: रिपोर्ट

प्रवासी मजदूरों के घर लौटने से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र और दिल्ली के छोटे कारोबार: रिपोर्ट

लॉकडाउन के कारण शहरों में रहने वाले लाखों लोगों को इस साल मार्च और अप्रैल में अपने घर लौटना पड़ा है क्योंकि उनके पास कोई जॉब नहीं बची थी

Publish Date:Wed, 05 Aug 2020 04:28 PM (IST) Author: Nitesh

नई दिल्ली, पीटीआइ। COVID-19 और उसके बाद लगे लॉकडाउन से प्रवासी मजदूरों को कार्यस्थल पर लौटने में मुश्किल हो रही है, इससे सबसे ज्यादा नुकसान छोटे व्यवसायों को हो रहा है, विशेष रूप से महाराष्ट्र और दिल्ली इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

इंडिया रेंटिग्स एंड रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट कहती है कि मजदूरों की कमी के कारण ऑटोमेशन की गति तेज हुई है लेकिन विनिर्माण क्षेत्र को हाल फिलहाल क्षमता का कम इस्तेमाल और हायर प्रोडक्शन कॉस्ट का सामना करना पड़ेगा। इससे उनके मुनाफे पर असर होगा।

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने कहा कि स्वचालन में बदलाव के कारण श्रम की कमी के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में इकाइयां कम क्षमता के उपयोग, उच्च उत्पादन लागत जैसे निकट अवधि में मुश्किल का सामना कर रही हैं।

लॉकडाउन के कारण शहरों में रहने वाले लाखों लोगों को इस साल मार्च और अप्रैल में अपने घर लौटना पड़ा है, क्योंकि उनके पास कोई जॉब नहीं बची थी और शहर में रहने पर भारी खर्च अदा करना पड़ रहा था। अनलॉक शुरू होने के बाद से आर्थिक गतिविधि में एक बार फिर तेजी आई है लेकिन अभी यह पहले की तुलना में धीमा ही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि COVID-19 के बढ़ते मामलों और विभिन्न राज्यों द्वारा लगाए गए लॉकडाउन प्रवासी श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर लौटने से रोक रहे हैं, हालांकि इस तरह के उपाय प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र और दिल्ली में विनिर्माण क्षेत्र में विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विघटन सबसे ज्यादा होगा।

एजेंसी ने कहा कि इसने भारतीय राज्यों और क्षेत्रों में महामारी से उत्पन्न रिवर्स माइग्रेशन की गतिशीलता और प्रभाव का आकलन किया है। 

महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और गुजरात राज्यों में सबसे ज्यादा प्रवासी जाते हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में इसका असर होगा, क्योंकि यह सेक्टर यह 60 लाख अंतर-राज्यीय प्रवासियों को रोजगार देता है।

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