एसबीआई ने मिलाया अडानी कैपिटल से हाथ, किसानों को असानी से उपलब्ध हो सकेगा लोन

भारतीय स्टेट बैंक ने किसानों को आसानी से लोन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अडानी कैपिटल से हाथ मिलाया है। गुरुवार को एक विज्ञप्ति में बैंक ने बताया कि एसबीआई ने अडानी ग्रुप की एनबीएफसी शाखा अदानी कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड (अडानी कैपिटल) के साथ मास्टर समझौते पर हस्ताक्षर किया है।

Abhishek PoddarPublish:Thu, 02 Dec 2021 02:35 PM (IST) Updated:Fri, 03 Dec 2021 07:37 AM (IST)
एसबीआई ने मिलाया अडानी कैपिटल से हाथ, किसानों को असानी से उपलब्ध हो सकेगा लोन
एसबीआई ने मिलाया अडानी कैपिटल से हाथ, किसानों को असानी से उपलब्ध हो सकेगा लोन

नई दिल्ली, पीटीआइ। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने किसानों को आसानी से लोन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए, अडानी कैपिटल से हाथ मिलाया है। गुरुवार को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए स्टेट बैंक ने यह बयान दिया कि, "एसबीआई ने अडानी ग्रुप की एनबीएफसी शाखा, अदानी कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड (अडानी कैपिटल) के साथ एक मास्टर समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इस समझौते के बाद किसानों को टैक्टर और अन्य कृषि संबंधित उपकरणों के लिए आसानी से लोन उपलब्ध हो सकेगा, और किसानों को फसल उत्पादन को बढ़ाने में सहायता हो सकेगी।"

"एसबीआई सक्रिय रूप से किसानों की आय को दोगुना करने के लिए लोन प्रवाह बढ़ाने के लिए कृषि मशीनीकरण, गोदाम रसीद वित्त, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) आदि को पैसा उपलब्ध कराने के लिए कई एनबीएफसी के साथ सह-उधार के अवसरों को देख रहा है।"

एसबीआई के अध्यक्ष दिनेश खारा ने इस बारे में बयान देते हुए यह कहा कि, "इस साझेदारी से एसबीआई को ग्राहक आधार का विस्तार करने के साथ-साथ देश के कम सेवा वाले कृषि क्षेत्र से जुड़ने और भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान करने में मदद मिलेगी। दूर-दराज के इलाकों में ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने और अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराने के लिए हम और एनबीएफसी के साथ काम करना जारी रखेंगे।"

अडानी कैपिटल के एमडी और सीईओ गौरव गुप्ता ने इस समझौते के बारे में जानकारी देते हुए यह कहा कि, "कंपनी का उद्देश्य कृषि मशीनीकरण में योगदान देना और कृषि खंड की उत्पादकता और आय में सुधार करने में भूमिका निभाना है। हमारा उद्देश्य भारत के सूक्ष्म-उद्यमियों को किफायती लोन उपलब्ध कराना है। एसबीआई के साथ हमारी साझेदारी बिना बैंक या सीमित बैकिंग सुविधा वाले भारतीय किसानों को लक्षित करना है।"

बैंकों और एनबीएफसी के लिए सह-उधार योजनाओं पर आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत, अर्थव्यवस्था के कम सेवा वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता के साथ उधार देने के रूप में और सस्ती दरों पर लोन प्रवाह में सुधार करना है।