किचन में जल्द गलेगी सिर्फ घरेलू दाल, Free में बांटे जा रहे हैं अरहर, मूंग और उड़द बीजों के 20 लाख पैकेट

आयात निर्भरता खत्म होने की सूरत में इतनी बड़ी धनराशि का घरेलू दलहन खेती पर खर्च किया जा सकता है।

दलहनी फसलों की पैदावार और उसकी उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति के तहत आगामी सीजन में ही खेती का रकबा बढ़ाने के साथ किसानों को उन्नत प्रजाति के बीजों का वितरण का व्यापक अभियान जोर-शोर से चल रहा है।

Ankit KumarTue, 11 May 2021 10:54 AM (IST)

नई दिल्ली, सुरेंद्र प्रसाद सिंह। दालों के मामले में आत्मनिर्भर होने को ठान चुकी सरकार ने आगामी खरीफ सीजन के लिए अपनी व्यापक तैयारियों को अंजाम देना शुरू कर दिया है। दलहनी फसलों की पैदावार और उसकी उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति के तहत आगामी सीजन में ही खेती का रकबा बढ़ाने के साथ किसानों को उन्नत प्रजाति के बीजों का वितरण का व्यापक अभियान जोर-शोर से चल रहा है। आयात निर्भरता से पूरी तरह मुक्त होने के लिए सरकार ने खरीफ सीजन में पिछले वर्षो मुकाबले 10 गुना से भी अधिक किसानों को बीजों का पैकेट बांटने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत सभी राज्यों को समय पर बीजों का पैकेट भेज दिया गया है।  

दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना भी सरकार की प्राथमिकता में शुमार है। यही वजह है कि घरेलू जिंस मंडियों में दलहनी फसलों के ताजा भाव सरकार के निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुकाबले अधिक चल रहे हैं। इसका फायदा किसानों को मिल रहा है। जानकारों का मानना है कि कृषि उत्पादों के बाजार भाव एमएसपी से 10 फीसद अधिक मिलना संतोषजनक संकेत है। मंडियों में फिलहाल कीमतें एमएसपी के मुकाबले 10-20 फीसद तक अधिक बोली जा रही हैं। खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय का कहना है कि दालों के आयात पर सालाना 15,000-20,000 करोड़ रुपये के बराबर विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। 

आयात निर्भरता खत्म होने की सूरत में इतनी बड़ी धनराशि का घरेलू दलहन खेती पर खर्च किया जा सकता है। दलहन उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि मंत्रालय ने पहली जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन की खेती के लिए देश के दलहन उत्पादक राज्यों के किसानों को हर तरह की मदद देने का फैसला किया है। दलहन उत्पादकता बढ़ाने के लिए केंद्र ने राज्य सरकारों से विचार-विमर्श करके एक विस्तृत योजना तैयार की है।

खरीफ सीजन की प्रमुख दलहनी फसल अरहर (तूअर), मूंग और उड़द की उत्पादकता बढ़ाने के साथ इन फसलों का बोआई रकबा बढ़ाने की व्यापक योजना पर काम जारी है। अत्यधिक उत्पादकता वाली इन फसलों के बीजों को किसानों तक पहुंचाने की योजना है, जिसमें केंद्रीय बीज एजेंसियों के साथ राज्यों की बीज एजेंसियां भी जुटी हुई हैं। किसानों को इन फसलों के बीज मुफ्त बांटे जा रहे हैं।

आगामी खरीफ सीजन 2021-22 में कुल 20 लाख से अधिक मिनी बीज किट बांटने का प्रावधान है। यह संख्या पिछले वर्षो में वितरित पैकेट के मुकाबले 10 गुना अधिक है। इस पर कुल 82 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। दलहनी फसलों पर यह पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। वितरित किए जाने वाले पैकेट में सर्वाधिक 13.52 लाख पैकेट अरहर के हैं, जबकि लगभग पांच लाख पैकेट मूंग के और पौने दो लाख पैकेट उड़द के होंगे।

इन राज्यों में होगा वितरण

अरहर बीज के मिनी किट बांटने के लिए 11 राज्यों के 187 जिलों का चयन किया गया है। इनमें आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश हैं। मूंग के बीजों का वितरण नौ राज्यों के 85 जिलों में किया जाएगा। इनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। इसी तरह उड़द के लिए छह राज्यों के 60 जिलों को चिन्हित किया गया है। इनमें आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के नाम हैं। इस योजना की सफलता के लिए बीज वितरण के काम में भारतीय कृषि अऩुसंधान परिषद के संस्थानों के साथ जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों को लगाया गया है।

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