सरकार ने स्पेशियलिटी स्टील सेक्टर में 6,322 करोड़ रुपये की PLI स्कीम को दी मंजूरी, 5.25 लाख लोगों को मिलेगा Job

सरकार ने गुरुवार को देश में स्पेशियलिटी स्टील सेक्टर में प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए 6322 करोड़ रुपये की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम को अपनी मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस बाबत फैसला किया गया।

Ankit KumarThu, 22 Jul 2021 07:00 PM (IST)
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस बात की जानकारी दी।

नई दिल्ली, पीटीआइ। स्पेशलिटी स्टील यानी विशेष प्रकार के स्टील उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए गुरुवार को कैबिनेट कमेटी ने 6,322 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआइ) योजना को मंजूरी दे दी। इस स्कीम की अवधि वर्ष 2023-24 से वर्ष 2027-28 तक पांच वर्षों की होगी। इस स्कीम के तहत लगभग 40,000 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है जिससे लगभग 5.25 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इनमें से 68,000 प्रत्यक्ष रोजगार होंगे। अभी विशेष प्रकार के स्टील का काफी मात्रा में आयात हो रहा है।

विशेष इस्पात की पांच श्रेणियों को पीएलआइ स्कीम में शामिल किया गया है। इनमें कोटेड-प्लेटेड स्टील, हाई स्ट्रेंथ, स्पेशलिटी रेल, अलाय स्टील उत्पाद और स्टील वायर एवं इलेक्टि्रकल स्टील शामिल हैं। इस योजना के पूरा होने के बाद भारत एपीआइ ग्रेड पाइप, हेड हार्डेन्ड रेल, इलेक्टि्रकल स्टील जैसे उत्पादों की मैन्यूफैक्चरिंग शुरू कर देगा। इनकी फिलहाल बहुत ही सीमित मात्रा में या नहीं के बराबर मैन्यूफैक्चरिंग होती है।

पीएलआइ स्कीम के तीन स्लैब होंगे। सबसे कम स्लैब चार फीसद और सबसे अधिक 12 फीसद का होगा। लेकिन किसी भी कंपनी को एक वर्ष में 200 करोड़ से अधिक का प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। वर्ष 2020-21 में 10.2 करोड़ टन टन इस्पात का उत्पादन किया गया। इनमें से मूल्य-वर्धित (वैल्यू एडेड) और विशेष इस्पात का उत्पादन 1.8 करोड़ टन का था।

बीते वित्त वर्ष में विभिन्न प्रकार के 67 लाख टन स्टील का आयात किया गया इनमें से लगभग 40 लाख टन आयात विशेष इस्पात का था। इस आयात में लगभग 30,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा का व्यय हुआ।वर्ष 2026-27 के अंत तक विशेष इस्पात का उत्पादन 4.2 करोड़ टन होने का अनुमान है। इनमें से 2.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के विशेष इस्पात की खपत घरेलू बाजार में होगी। इस अवधि तक विशेष इस्पात का निर्यात वर्तमान के 17 लाख टन से बढ़कर लगभग 55 लाख टन हो जाएगा जिससे 33,000 करोड़ रुपय की विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी।

 

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.