शीर्ष अधिकारियों पर आरोप के बाद इन्फोसिस के शेयर धड़ाम, मार्केट कैप में 53 हजार करोड़ रुपये की आई गिरावट

नई दिल्ली, पीटीआइ। दिग्गज आइटी कंपनी इन्फोसिस के शीर्ष अधिकारियों पर अनुचित व्यापार नीति अपनाने के आरोप लगने के बाद मंगलवार को कंपनी के शेयरों में करीब 17 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के कारण कंपनी के बाजार पूंजीकरण में एक ही दिन में 53,451 करोड़ रुपये की कमी आई। गिरावट के बाद कंपनी का बाजार पूंजीकरण घटकर 2,76,300.08 करोड़ रुपये रह गया। अप्रैल, 2013 के बाद इन्फोसिस के शेयरों में यह सबसे बड़ी गिरावट है।

इन्फोसिस के शेयरों में बड़ी गिरावट का असर पूरे शेयर बाजार पर देखने को मिला। इस दौरान बीएसई का सेंसेक्स 334.54 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं एनएसई के निफ्टी में भी गिरावट दर्ज की गई। खुद को एथिकल एंप्लाई कहने वाले कंपनी के कुछ अज्ञात कर्मचारियों (व्हिसलब्लोअर) ने इसके सीईओ सलिल पारेख और सीएफओ निलंजन रॉय पर व्यापार में मुनाफा दिखाने के लिए अनुचित नीतियां अपनाने का आरोप लगाया था। कंपनी की ओर से कहा गया है कि इस मामले की शिकायत ऑडिट कमेटी को सौंप दी गई है।दिन के कारोबार में बीएसई में इन्फोसिस के शेयर 16.21 परसेंट की गिरावट के साथ 643.30 रुपये प्रति शेयर के मूल्य पर बंद हुए। एनएसई में कंपनी के शेयर 16.65 परसेंट की गिरावट के साथ 640 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर बंद हुए।

डैमेज कंट्रोल में जुटी इन्फोसिस

शेयर बाजार में कंपनी के विरुद्ध बने माहौल को संभालने के लिए इन्फोसिस डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा कि कंपनी की ऑडिट कमेटी स्वतंत्र रूप से आरोपों की जांच करेगी। नीलेकणि ने शेयर बाजारों को बताया कि कमेटी ने कंपनी के स्वतंत्र इंटर्नल ऑडिटर्स से सलाह-मशविरा शुरू कर दिया है। इसके साथ ही स्वतंत्र जांच के लिए शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी लॉ फर्म से संपर्क किया है।

पिछले महीने मिले थे पत्र

कंपनी के बोर्ड मेंबर्स ने 30 सितंबर को दो शिकायती पत्र प्राप्त किए थे। इन पत्रों में अनुचित गतिविधियों की शिकायत की गई थी। इन्हें 10 अक्टूबर को कंपनी की ऑडिट कमेटी के सामने पेश किया गया और इसके अगले दिन इस बारे में कंपनी के नॉन एक्जीक्यूटिव सदस्यों को भी अवगत कराया गया। शिकायत पत्र में आरोपितों के ई-मेल और वॉइस रिकॉर्डिग मौजूद होने की बात कही गई है।

क्या है आरोप?

कंपनी के अधिकारियों पर व्यापार में मुनाफा दिखाने के लिए वीजा लागत को कम करके दिखाने, 353 करोड़ रुपये के रिवर्सल को नजरंदाज करने और कुछ सौदों की जानकारी छिपाने जैसी अनुचित गतिविधियों का आरोप लगा है। बोर्ड की ओर से पत्र का जवाब नहीं मिलने पर इन कर्मचारियों ने तीन अक्टूबर को अमेरिका स्थित ऑफिस ऑफ द व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन प्रोग्राम को भी इस बारे में जानकारी दी थी।

 

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