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गांवों की ओर चले उद्योग जगत: उदय कोटक बोले- इससे शहरों पर घटेगा बोझ, गांवों की इकोनॉमी मबजूत होगी

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। लॉकडाउन ने जिस तरह से प्रवासी मजदूरों को उनके गांव व घर की तरफ लौटने को विवश किया है, उससे देश के उद्योग जगत पर भी बुरा असर पड़ा है। वैसे इस रिवर्स माइग्रेशन यानी शहरों से निकलकर गांवों की ओर जाने से कल-कारखानों में तात्कालिक तौर पर श्रमिकों की कमी हो सकती है। लेकिन उद्योग जगत मानता है कि इससे मौजूदा अर्थनीति में भी बदलाव का एक अवसर मिला है। देश के सबसे प्रमुख उद्योग चैंबर सीआइआइ के नए प्रेसिडेंट उदय कोटक ने सरकार से आह्वान किया है कि वह उद्योग जगत के साथ मिलकर एक नीति बनाए।

यह नीति कल-कारखानों व दूसरी आर्थिक गतिविधियों को कुछ बड़े शहरों तक केंद्रित रखने की जगह ग्रामीण इलाकों तक जाने में प्रोत्साहित करे। इससे ना सिर्फ शहरों पर बोझ कम कर उन्हें ज्यादा बेहतर बनाया जा सकता है, बल्कि भारतीय इकोनॉमी के ढांचे को और सुदृढ़ व व्यापक बनाया जा सकता है। सीआइआइ ने अपने रोडमैप में भी सामाजिक ढांचे पर ज्यादा जोर दिया है और यह संकेत दिया है कि वह बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलाव के लिए कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है।

देश के प्रमुख बैंकरों में एक और कोटक महिंद्रा बैंक के प्रमुख उदय कोटक ने दो दिन पहले ही सीआइआइ के प्रेसिडेंट का पदभार संभाला। उन्होंने गुरुवार को पहला प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। हर वर्ष सीआइआइ प्रेसिडेंट का यह प्रेस कॉन्फ्रेंस होता है, जिसमें पूरे साल के लिए विकास दर का लक्ष्य बताया जाता है। लेकिन कोटक ने कहा कि कोरोना वायरस से जो स्थिति बनी है उसमें अभी सब कुछ अस्पष्ट है। ऐसे में इस वर्ष हम ग्रोथ रेट का कोई लक्ष्य नहीं रख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि ग्रोथ रेट अभी निगेटिव में रह सकती है यानी इकोनॉमी बढ़ने के बजाय नीचे आ सकती है। 

सनद रहे कि आरबीआइ ने भी इसी तर्क के आधार पर अभी तक कोई लक्ष्य नहीं रखा है। बहरहाल, सीआइआइ प्रेसिडेंट ने सरकार व अपने सदस्यों के लिए एक 10 सूत्रीय रोडमैप जरूर दिया है जो मौजूदा चुनौतियों से लड़ने में मददगार साबित हो सकता है। सीआइआइ का यह रोडमैप भी इंडिया इंक की बदलती मनोदशा को दर्शाता है जिसमें सरकार से भारी भरकम वित्तीय मदद मांगने से ज्यादा स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबों के लिए बेहतर सुविधा जैसे मूलभूत बातों पर जोर दिया गया है।

रोडमैप का पहला बिंदु लोगों के जीवन व जीवकोपार्जन को बचाने का रखा गया है। इसमें कहा गया है कि 80 फीसद रोजगार असंगठित क्षेत्र में मिलता है जहां किसी प्रकार की समाजिक सुरक्षा नहीं है। असंगठित सेक्टर को संगठित सेक्टर में तब्दील करने के लिए हमें श्रम सुधारों को सही तरीके से लागू करना होगा। दूसरा प्वाइंट शिक्षा व हेल्थ सेक्टर में खर्चे में बड़ी वृद्धि व भविष्य में कोरोना वायरस जैसी महामारियों से लड़ने के लिए दीर्घकालिक नीति बनाने की मांग का है। तीसरे बिंदु में प्रकृति को बचाने को प्राथमिकता के तौर पर लेने की बात कही गई है। चौथे नंबर पर राजकोषीय घाटे व वित्तीय स्थायित्व को रखा गया है। पांचवां बिंदु सीधे तौर पर व्यक्तिगत व उद्योग जगत को राहत देने से संबंधित है। इसके लिए सरकार को वित्तीय मदद उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके बाद डिजिटल इकोनॉमी की बढ़ती भूमिका को स्वीकार करते हुए उसे ज्यादा ग्राह्य बनाने की बात कही गई है। 

डिजिटल इकोनॉमी बढ़ने से ग्रामीण जनता के पीछे छूट जाने का खतरा है जिस पर सरकार का ध्यान दिलाया गया है। इसके बाद रोजगार व रोजगार की गारंटी का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि चीन से विस्थापित होने वाली कंपनियों को भारत में आने के लिए बढ़-चढ़कर प्रोत्साहन देने की बात है। आठवें नबंर पर शहरी व ग्रामीण सेक्टर में सामंजस्य स्थापित करने के लिए उद्योग जगत को गांवों की तरफ से ले जाने की बात कही गई है। अंत के दोनों बिंदुओं को ग्रोथ पर फोकस रखा गया है। सीआइआइ के मुताबिक भारत जैसे विकासशील देश में आर्थिक विकास का निम्न रेट सहन नहीं किया जा सकता। इसलिए ग्रोथ रेट को तेज करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी होगी।

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