कोरोना-काल में खूब निर्यात हो रहे भारतीय मसाले, विदेशों में भी काढ़ा पिये जाने से बढ़ी मांग

भारतीय मसालों के लिए तस्वीर Pic Credit : Pixabay
Publish Date:Sat, 26 Sep 2020 07:38 PM (IST) Author: Pawan Jayaswal

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना से बचने के लिए विदेश में भी लोग भारत के परंपरागत काढ़े को पी रहे हैं। इस कारण वस्तुओं के कुल निर्यात में गिरावट के बावजूद मसाले के निर्यात में बढ़ोतरी हो रही है। स्पाइस बोर्ड के अनुमान के मुताबिक, इस साल अप्रैल-जुलाई के दौरान मसाले के कुल निर्यात में 10 फीसद की बढ़ोतरी का अनुमान है। जबकि इस साल अप्रैल-जुलाई के बीच वस्तुओं के कुल निर्यात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 30 फीसद की गिरावट रही।

स्पाइस बोर्ड के अनुमान के मुताबिक इस साल अप्रैल-जुलाई में 4.33 लाख टन मसाले का निर्यात किया गया जिसकी अनुमानित कीमत 7760 करोड़ रुपए बताई गई। पिछले साल अप्रैल-जुलाई में 3.92 लाख टन मसाले का निर्यात किया गया था जिसकी कीमत 7028 करोड़ रुपए बताई गई। इस प्रकार मात्रा और कीमत दोनों ही स्तर पर मसाले के निर्यात में इस साल लगभग 10 फीसद का इजाफा रहा।

निर्यातकों ने बताया कि अभी अन्य वस्तुओं की मांग में भारी गिरावट है, लेकिन भारतीय मसाले में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के गुण होने की वजह से मसाले की मांग में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। स्पाइस बोर्ड के मुताबिक, इस साल अप्रैल-जुलाई में अदरक, हल्दी, जीरा और धनिया की निर्यात मांग अन्य मसाले के मुकाबले अधिक रही।

मुख्य रूप से भारत अमेरिका और यूरोप के देशों को मसाले का निर्यात करता है, लेकिन कोरोना काल में बांग्लादेश, मोरक्को, इरान, मलेशिया और चीन जैसे देशों से भी भारतीय मसाले की मांग आ रही है। भारत के गर्म मसाले के साथ अन्य मसाले का भी निर्यात किया जाता है। मुख्य रूप से अदरक, हल्दी, धनिया, जीरा, तेजपत्ता, लहसून, मिर्च, लौंग, करी पाउडर जैसे मसाले निर्यात किए जाते हैं।

2019-20 में अदरक के निर्यात में 176 फीसद की बढ़ोतरी

विदेश में भारतीय अदरक की बढ़ती मांग का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2019-20 में अदरक के निर्यात में वित्त वर्ष 2018-19 के मुकाबले 176 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 में 6.57 करोड़ डॉलर के अदरक का निर्यात किया गया जबकि इससे पूर्व के वित्त वर्ष में यह निर्यात 3.12 करोड़ डॉलर का था। भारतीय अदरक की सबसे अधिक मांग अमेरिका में हैं।

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