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भारतीय कंपनियों के विदेशी ग्राहकों को कंसल्टेंसी सेवा देने पर लगेगा जीएसटी

नई दिल्ली, पीटीआइ। अगर किसी कंपनी ने किसी अन्य भारतीय कंपनी के विदेशी ग्राहक को इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर से संबंधित सेवा दी है, तो उसे 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी का भुगतान करना होगा। अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (AAR) ने यह व्यवस्था दी है। परोक्ष रूप से आइटी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों पर एएआर के इस फैसले का सीधा असर दिख सकता है। 

ओरेकल ईआरपी के क्षेत्र में कंसल्टेंसी सेवा मुहैया करा रही एक कंपनी ने एएआर की तमिलनाडु पीठ में एक याचिका दायर की थी। याचिका के माध्यम से उसने पूछा था कि अगर वह जीएसटी में पंजीकृत आइटी कंपनी डोएन सिस्टम्स के एक विदेशी ग्राहक को आइटी सेवा मुहैया कराती है, तो क्या इसे सेवाओं के निर्यात के रूप में देखा जाएगा। 

इस मामले में मूल करार डोएन सिस्टम्स और अमेरिका स्थित एक ग्राहक के बीच हुआ था। उसके बाद डोएन ने इस याचिकाकर्ता कंपनी से भी एक करार किया कि अमेरिकी ग्राहक को जो भी सेवा चाहिए, उसके एक हिस्से की पूर्ति वह करे। इसके एवज में डोएन सिस्टम्स उसे शुल्क का भुगतान करेगी।

हालांकि अमेरिका स्थित ग्राहक को भुगतान के मामले में इससे कोई लेना-देना नहीं था कि डोएन सिस्टम्स और इस याचिकाकर्ता कंपनी के बीच क्या करार हुआ है। उसे उतना ही भुगतान करना था जितने का करार उसके और डोएन सिस्टम्स के बीच हुआ था। मामले में पेच यहां फंसा कि याचिकाकर्ता कंपनी के मुताबिक उसने अमेरिका स्थित ग्राहक को सीधी सेवा दी और डोएन ने उस विदेशी कंपनी की ओर से उसे भुगतान किया।

एएआर का कहना था कि इस मामले में दो करार हुए हैं। एक करार याचिकाकर्ता कंपनी और डोएन सिस्टम्स के बीच हुआ, जिसके तहत डोएन ने अपने ग्राहक के लिए याचिकाकर्ता से पेशेवर व कंसल्टेंसी सेवा ली। दूसरा करार डोएन और अमेरिकी कंपनी के बीच हुआ, जिसके तहत अमेरिकी कंपनी ने डोएन से कंसल्टेंसी सेवाएं लीं। लेकिन याचिकाकर्ता इस दूसरे करार का हिस्सा नहीं है। 

एएआर के मुताबिक याचिकाकर्ता की यह दलील स्वीकार्य नहीं है कि उसने डोएन सिस्टम्स के एजेंट के रूप में अपनी सेवा दी और उसका शुल्क हासिल किया। इसकी वजह यह है कि एजेंट की जो परिभाषा होती है, याचिकाकर्ता उस दायरे में नहीं आता है। ऐसे में याचिकाकर्ता कंपनी को डोएन सिस्टम्स द्वारा नियुक्त एक कंसल्टेंट समझा जा सकता है और उसने डोएन को जो भी सेवा दी है, उस पर सीजीएसटी और तमिलनाडु जीएसटी एक्ट के तहत उचित शुल्क का भुगतान करना होगा।

 

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