केंद्र सरकार के पास राज्यों का लगभग 52,000 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा लंबित: वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को संसद को सूचित करते हुए यह जानकारी दी है कि सितंबर 2021 तक राज्यों को जीएसटी मुआवजे का लगभग 52000 करोड़ रुपये बकाया था। राज्यों को 2020-21 और 2021-22 में 110208 करोड़ रुपये और 1.59 लाख करोड़ रुपये जारी किए गए थे।

Abhishek PoddarMon, 29 Nov 2021 07:00 PM (IST)
केंद्र सरकार के पास राज्यों का लगभग 52,000 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा लंबित है

नई दिल्ली, पीटीआइ। सरकार ने सोमवार को संसद को सूचित करते हुए यह जानकारी दी है कि, "सितंबर 2021 तक राज्यों को जीएसटी मुआवजे का लगभग 52,000 करोड़ रुपये बकाया था।" वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 24 नवंबर, 2021 को जारी हो चुके और जारी किए जाने के लिए वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे का विवरण देते हुए लोकसभा में कहा कि, "राज्यों को क्रमशः साल 2020-21 और 2021-22 के वित्तीय वर्ष में बैक टू बैक लोन के रूप में 1,10,208 करोड़ रुपये और 1.59 लाख करोड़ रुपये जारी किए गए थे। सितंबर 2021 तक लंबित कुल जीएसटी मुआवजा 51,798 करोड़ रुपये था।"

इसमें महाराष्ट्र को 13,153 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश के 5,441 करोड़ रुपये, तमिलनाडु के 4,943 करोड़ रुपये, दिल्ली के 4,647 करोड़ रुपये और कर्नाटक के 3,528 करोड़ रुपये लंबित हैं। जबकि, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड राज्यों के पास केंद्र से कोई जीएसटी मुआवजा लंबित नहीं है। एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि, "केंद्र ने 3 नवंबर, 2021 को राज्यों को जीएसटी मुआवजे के लिए मुआवजा कोष से 17,000 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्यों को जारी किए गए 43,303 करोड़ रुपये के जीएसटी मुआवजे और एक के बाद एक 1.59 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त है।"

वित्त वर्ष 2020-21 (अप्रैल 2020- मार्च 2021) के दौरान, केंद्र सरकार ने राज्यों को 1,36,988 करोड़ रुपये का मुआवजा और 1.1 लाख करोड़ रुपये की बैक टू बैक लोन सहायता जारी की थी। जीएसटी कानून के तहत, राज्यों को जून 2022 तक पांच साल के लिए जीएसटी के कार्यान्वयन के कारण होने वाले राजस्व के किसी भी नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए जीएसटी मुआवजे का भुगतान राज्यों को पहले ही किया जा चुका है।

चौधरी ने कहा कि, "महामारी के आर्थिक प्रभाव से जीएसटी संग्रह कम होने और साथ ही जीएसटी मुआवजा उपकर के कम संग्रह के कारण अधिक मुआवजे की आवश्यकता हुई है।"

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