देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर, विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 600 अरब डॉलर के पार पहुंचा

मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार का एक फायदा यह भी होगा कि मौद्रिक दबाव की स्थिति में आरबीआइ इस भंडार का सदुपयोग करने की स्थिति में होगा जिससे किन्हीं आकस्मिक विषम परिस्थितियों में बाजारों की अस्थिरता पर लगाम लगाई जा सकेगी।

Pawan JayaswalSat, 12 Jun 2021 08:30 AM (IST)
Foreign Exchange Reserves P C : Pixabay

नई दिल्ली, पीटीआइ। देश का विदेशी मुद्रा भंडार चार जून को खत्म सप्ताह में 600 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड को पार कर गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा दी जानकारी के मुताबिक, बीते सप्ताह के दौरान इसमें 6.842 अरब डॉलर का उछाल आया और यह 605.008 अरब डॉलर का हो गया। विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ एक वर्ष में ही 100 अरब डॉलर का उछाल आ गया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले वर्ष पांच जून को खत्म हुए सप्ताह में 500 अरब डॉलर के ऊपर पहुंचा था।

आरबीआइ द्वारा दी जानकारी के मुताबिक, समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में 7.362 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। इस बढ़त के साथ विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का मूल्य बढ़कर 560.890 अरब डॉलर पर जा पहुंचा। एफसीए में डॉलर समेत यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं को भी शामिल किया जाता है। इनके मूल्य की गणना भी डॉलर के भाव में ही की जाती है। हालांकि समीक्षाधीन सप्ताह में देश के स्वर्ण भंडार का मूल्य 50.20 करोड़ डॉलर घटकर 37.604 अरब डॉलर का रह गया।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार छह अप्रैल, 2007 को खत्म सप्ताह में 200 अरब डॉलर के ऊपर पहुंचा था। उसके बाद 300 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने में इसे सात वर्ष लग गए थे। विदेशी मुद्रा भंडार ने 28 मार्च, 2014 को खत्म सप्ताह में 300 अरब डॉलर को पार किया था। हालांकि, उसमें 100 अरब डॉलर जुड़ने में सिर्फ तीन वर्ष से कुछ अधिक का वक्त लगा और विदेशी मुद्रा भंडार आठ सितंबर, 2017 को 400 अरब डॉलर के ऊपर था। अगले ढाई वर्षों में ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार 100 अरब डॉलर बढ़कर पांच जून, 2020 को 500 अरब डॉलर के ऊपर जा चुका था। विदेशी मुद्रा भंडार में सर्वाधिक तेजी से 100 अरब डॉलर पिछले एक वर्ष के दौरान ही जुड़ा है।

जानकारों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में इस बढ़ोतरी का एक मुख्य कारण यह है कि पिछले एक वर्ष के दौरान कोरोना संकट के बावजूद इकोनॉमी की बुनियाद को लेकर विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार रहा है। कोरोना संकट के बीच इकोनॉमी को सुधारने के लिए पिछले एक वर्ष के दौरान सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उनके सकारात्मक नतीजों को लेकर भी अधिकतर विदेशी निवेशकों और विशेषज्ञों ने सहमति जताई है।

वहीं, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार का एक फायदा यह भी होगा कि मौद्रिक दबाव की स्थिति में आरबीआइ इस भंडार का सदुपयोग करने की स्थिति में होगा, जिससे किन्हीं आकस्मिक विषम परिस्थितियों में बाजारों की अस्थिरता पर लगाम लगाई जा सकेगी।

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