विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने पिछले दो सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में किया 5,319 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने पिछले दो सप्ताह के भीतर भारतीय शेयर में भारी गिरावट के बावजूद भी भारतीय पूंजी बाजार में 5319 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। जबकि अक्टूबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार में 12437 करोड़ रुपये के शुद्ध विक्रेता थे।

Abhishek PoddarSun, 28 Nov 2021 01:38 PM (IST)
FPI ने भारतीय शेयर में भारी गिरावट के बावजूद भी 5,319 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है।

नई दिल्ली, पीटीआई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने पिछले दो सप्ताह के भीतर भारतीय शेयर में भारी गिरावट के बावजूद भी भारतीय पूंजी बाजार में 5,319 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। जबकि, अक्टूबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार में 12,437 करोड़ रुपये के शुद्ध विक्रेता थे। डिपॉजिटरी से मिले आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने 1 से 26 नवंबर के बीच शेयर में शुद्ध रूप से 1,400 करोड़ रुपये और डेट सेगमेंट में 3,919 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जिससे कुल शुद्ध निवेश 5,319 करोड़ रुपये का हो गया।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने इस बारे में बयान देते हुए यह कहा कि, "एफपीआई के पास बड़ी मात्रा में बैंकिंग स्टॉक हैं, इसलिए वे भारतीय शेयर बाजार सेगमेंट में प्रमुख विक्रेता रहे हैं। निरंतर बिकवाली ने बैंकिंग शेयरों को आकर्षक बना दिया है। 26 नवंबर को बाजार में तेज गिरावट ने मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना और हांगकांग में देखे गए वायरस के संस्करण से चिंताएं उत्पन्न हुई है।"

मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर- मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, 'हालिया सुधार के बावजूद, बाजार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, इसलिए एफपीआई ने मुनाफावसूली की होगी। भारतीय डेट मार्केट में एफपीआई प्रवाह के संबंध में साप्ताहिक आधार पर ट्रेंड रिवर्सल एक आदर्श बन गया है। एफपीआई नए कोरोनावायरस संस्करण के प्रसार और विश्व स्तर पर विकास पर इसके संभावित प्रभाव को करीब से देख रहे होंगे। उच्च मूल्यांकन भी एक चिंता का विषय है जिससे नियमित अंतराल पर मुनाफावसूली जारी रह सकती है।

कोटक सिक्योरिटीज के हेड-इक्विटी रिसर्च (रिटेल) श्रीकांत चौहान ने कहा कि, "आगामी राज्य चुनावों जैसे प्रमुख आयोजनों को देखते हुए एफपीआई प्रवाह का भविष्य अस्थिर रहने की उम्मीद है, ब्याज दरों में वृद्धि की उम्मीद और एक नए कोविड संस्करण की चिंता नए गतिशीलता प्रतिबंधों को बढ़ावा देगी, आर्थिक सुधार में बाधा होगी।

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