अप्रैल-जून में 9 सेक्टरों में 3.08 करोड़ रोजगार, लेबर सर्वे में सामने आया आंकड़ा

ये क्षेत्र गैर-कृषि प्रतिष्ठानों में कुल रोजगार बढ़ने में सहायक। ये नौ चयनित क्षेत्र विनिर्माण निर्माण व्यापार परिवहन शिक्षा स्वास्थ्य आवास और रेस्तरां आईटी / बीपीओ और वित्तीय सेवाएं हैं। निर्माण विनिर्माण और आईटी/बीपीओ सहित नौ चुनिंदा क्षेत्रों में रोजगार 2021-22 की अप्रैल-जून तिमाही में 3.08 करोड़ था।

NiteshMon, 27 Sep 2021 06:34 PM (IST)
Employment in 9 sectors at 3 08 crore in April June finds labour survey

नई दिल्ली, पीटीआइ। निर्माण, विनिर्माण और आईटी/बीपीओ सहित नौ चुनिंदा क्षेत्रों में रोजगार, 2021-22 की अप्रैल-जून तिमाही में 3.08 करोड़ था। यह सर्वेक्षण के अनुसार 2013-14 की आर्थिक जनगणना में 2.37 करोड़ की तुलना में 29 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है। श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को श्रम ब्यूरो की ओर से तैयार अखिल भारतीय त्रैमासिक स्थापना आधारित रोजगार सर्वेक्षण (AQEES) के तिमाही रोजगार सर्वेक्षण (क्यूईएस) भाग (अप्रैल से जून 2021) की रिपोर्ट जारी की।

रिजल्ट की घोषणा करते हुए यादव ने कहा कि इन क्षेत्रों में कुल मिलाकर कुल 2 करोड़ और 37 लाख के मुकाबले क्यूईएस के पहले दौर से नौ चयनित क्षेत्रों में अनुमानित कुल रोजगार 3 करोड़ 8 लाख है। (ईसी 2013-14) 29 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है।

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ये क्षेत्र गैर-कृषि प्रतिष्ठानों में कुल रोजगार बढ़ने में सहायक। ये नौ चयनित क्षेत्र विनिर्माण, निर्माण, व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रेस्तरां, आईटी / बीपीओ और वित्तीय सेवाएं हैं।

यादव ने कहा, 'चयनित नौ क्षेत्रों में अनुमानित कुल रोजगार में विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 41 प्रतिशत, शिक्षा में 22 प्रतिशत और स्वास्थ्य में 8 प्रतिशत का योगदान है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि श्रम के सभी पहलुओं पर जानकारी जरूरी है। श्रम मंत्री ने कहा, साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और सांख्यिकी आधारित क्रियान्वयन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का प्रमुख फोकस है।

शुद्धता और सत्यनिष्ठा के साथ वैज्ञानिक रूप से एकत्र किए गए इस तरह के डेटा को क्रॉस-चेक किया जा सकता है, जो सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के लक्षित और अंतिम मील वितरण को प्राप्त करने के लिए बेहद फायदेमंद होगा।

महामारी से रोजगार छंटनी/गिरावट पर निष्कर्षों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि यह पाया गया कि 27 प्रतिशत प्रतिष्ठानों में इसका प्रभाव था, लेकिन उम्मीद की बात यह थी कि 81 प्रतिशत श्रमिकों को लॉक-डाउन के दौरान पूरी मजदूरी मिली।

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