कोविड की दूसरी लहर आर्थिक रिकवरी की राह में सबसे बड़ी बाधा: RBI MPC की राय

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में MPC की बैठक इस माह हुई थी। (PC: AP Photo)

देश में मौद्रिक नीति तय करने वाली समिति (एमपीसी) ने कोरोना की दूसरी लहर को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय इकोनॉमी में रिकवरी होगी या नहीं इसको लेकर भी अनिश्चतता बन गई है।

Ankit KumarFri, 23 Apr 2021 08:30 AM (IST)

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। देश में मौद्रिक नीति तय करने वाली समिति (एमपीसी) ने कोरोना की दूसरी लहर को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय इकोनॉमी में रिकवरी होगी या नहीं, इसको लेकर भी अनिश्चतता बन गई है। आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली इस छह सदस्यीय समिति की अंतिम बैठक पांच-सात अप्रैल को हुई थी। गुरुवार को इस बैठक का विवरण जारी किया गया है। इस बैठक में कई ने सदस्यों देश में भीड़ पर नियंत्रण नहीं होने और टीकाकरण की धीमी रफ्तार पर भी चिंता जताई है।  

बैठक में दास ने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामले देश की अर्थव्यवस्था में सुधार की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। इस बैठक में एमपीसी ने कर्ज तय करने वाली दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। हालांकि समिति ने यह संकेत जरूर दिया था कि अगर जरूरत हुई तो आने वाले समय में ब्याज दरों को घटाया जा सकता है।

दास ने यह भी कहा कि इस वर्ष फरवरी में देश की आर्थिक विकास दर की संभावना को लेकर जो हालात थे उसमें बहुत बदलाव नहीं आया है। लेकिन एमपीसी के अन्य सदस्य इकोनॉमी की रिकवरी को लेकर चिंतित थे। 

अर्थशास्त्री आशिमा गोयल ने कहा है कि अनिश्चतता के इस दौर के बावजूद अगर 10 फीसद की विकास दर हासिल कर भी ली जाए तब भी हम वर्ष 2019 के स्तर पर ही रहेंगे। कोरोना की वजह से जो वक्त हमने खोया है उसकी क्षतिपूर्ति के लिए ज्यादा कोशिश करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा है कि एमपीसी को भी ज्यादा लचीला व्यवहार अपनाना होगा और जरूरत के मुताबिक कदम उठाने होंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि सुश्री गोयल ने तब तक के आंकड़ों को देखने के बाद यह आशंका जताई थी कि कोविड प्रभावित रोगियों की संख्या में भारी वृद्धि संभव है। प्रो. जयंत आर. वर्मा और डॉ. मृदुल के. सागर की नजर में भी कोविड के बढ़ते मामले सबसे ज्यादा खतरनाक संकेत हैं।

 

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