CCI ने दिए Tata Motors के खिलाफ विस्तृत जांच के आदेश, जानें क्या है पूरा मामला

घरेलू वाहन विनिर्माता Tata Motors की सांकेतिक तस्वीर

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने टाटा मोटर्स (Tata Motors) के खिलाफ लगे कुछ आरोपों की जांच का आदेश दिया है। ये आरोप डीलरशिप से जुड़े समझौतों में कंपनी द्वारा बाजार में अपनी मजबूत स्थिति के दुरुपयोग से जुड़े हैं।

Ankit KumarThu, 06 May 2021 02:27 PM (IST)

नई दिल्ली, पीटीआइ। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने Tata Motors के खिलाफ लगे कुछ आरोपों की जांच का आदेश दिया है। ये आरोप डीलरशिप से जुड़े समझौतों में कंपनी द्वारा बाजार में अपनी मजबूत स्थिति के दुरुपयोग से जुड़े हैं। आयोग ने इस आरोप की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। CCI ने टाटा मोटर्स (Tata Motors), टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (Tata Capital Financial Services Ltd) और टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड (Tata Motors Finance Ltd) के खिलाफ मिली दो शिकायतों के आधार पर ये आदेश दिए हैं। 

जानिए शिकायतकर्ताओं ने क्या कहा है

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने पाया है कि शिकायतकर्ताओं ने मुख्य रूप से अपनी शिकायत में यह कहा है कि टाटा मोटर्स ने बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का लाभ उठाते हुए कॉमर्शियल वाहनों के डीलरशिप से जुड़े सौदों में कम्पिटीशन एक्ट की धारा चार के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली नियम और शर्तों को लगाया है।  

प्रथम दृष्टया प्रावधानों के उल्लंघन की बात आई है सामने

रेगुलेटर ने इस संबंध में चार मई को आदेश दिया। सीसीआई ने 45 पृष्ठ के इस आदेश में कहा है कि शिकायतों में प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि टाटा मोटर्स के खिलाफ कम्पिटीशन एक्ट की धारा 3(4) और धारा 4 के उल्लंघन का मामला बनता है और इसकी जांच किए जाने की जरूरत है। 

प्रतिस्पर्धा आयोग ने इस मामले को अपनी डायरेक्टर जनरल, जांच इकाई, को विस्तृत जांच करने के लिए रेफर किया है। 

उल्लेखनीय है कि जिन मामलों में प्रथम-दृष्टया प्रतिस्पर्धा से जुड़े नियमों का उल्लंघन प्रतीत होता है, उन्हें डीजी को विस्तृत जांच के लिए भेजा जाता है। 

इन दो कंपनियों के खिलाफ नहीं होगी जांच 

इसके साथ ही सीसीआई ने यह स्पष्ट किया है कि इस मामले में टाटा कैपिटल और टाटा मोटर्स फाइनेंस की गतिविधियों या चैनल फाइनेंसिंग के लिए उनके द्वारा डीलरों के साथ किए गए समझौतों की जांच नहीं की जाएगी। इसकी वजह यह है कि CCI का मानना है कि ऐसा नहीं लगता कि ये दोनों कंपनियों अपने-अपने सेक्टर्स में वर्चस्व वाली स्थिति में हैं।

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