Cairn Arbitration: फ्रांस की एक अदालत ने भारतीय संपत्तियों को फ्रीज करने का दिया है आदेश, भारत सरकार ने की पुष्टि

केंद्र सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि फ्रांस की एक अदालत ने ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी (Cairn Energy) की एक याचिका पर फैसला देते हुए कुछ भारतीय परिसंपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश दिए हैं।

Ankit KumarTue, 27 Jul 2021 03:32 PM (IST)
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

नई दिल्ली, पीटीआइ। केंद्र सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि फ्रांस की एक अदालत ने ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी (Cairn Energy) की एक याचिका पर फैसला देते हुए कुछ भारतीय परिसंपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि एक आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के एक मामले में Cairn Energy के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद से कंपनी भारत से 1.72 बिलियन डॉलर रिकवर करने के प्रयासों में जुटी है।

सरकार ने संसद में दी जानकारी

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ने आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील की है। वहीं, फ्रांस की एक अदालत द्वारा भारतीय संपत्तियों को फ्रीज किए जाने के आदेश के बारे में चौधरी ने कहा, ''हां सर, फ्रांस की एक अदालत ने केयर्न एनर्जी मामले में एक आदेश पारित कर कुछ भारतीय परिसंपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश दिए हैं।''

हालांकि, मंत्री ने यह नहीं बताया कि किन प्रोपर्टीज को फ्रीज करने के आदेश दिए गए हैं। हालांकि, समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपनी पूर्व की एक रिपोर्ट में कहा था कि इन परिसंपत्तियों में इन 20 प्रोपर्टीज में अधिकतर फ्लैट हैं, जिनका मूल्य 20 मिलियन यूरो से ज्यादा आंका गया है।

फ्रांस की इस अदालत ने दिया था फैसला

फ्रांस की अदालत Tribunal Judiciaire de Paris ने 11 जून को मध्य पेरिस में स्थित भारत सरकार के स्वामित्व वाली आवासीय रियल एस्टेट परिसंपत्तियों को फ्रीज करने से संबंधित केयर्न की अर्जी को स्वीकार कर लिया था। इससे जुड़ी वैधानिक औपचारिकताएं इस महीने की शुरुआत में पूरी कर ली गईं।

चौधरी ने बताया कि द हेग स्थित एक आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने 21 दिसंबर, 2020 को रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स से जुड़े एक मामले में Cairn Energy Plc और Cairn UK Holdings Ltd (CUHL) के पक्ष में फैसला सुनाया था।

सरकार ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया है और नीदरलैंड्स की एक अदालत में इसके खिलाफ अपील दायर की है।

उन्होंने कहा कि देश के हितों की रक्षा करने के लिए संबंधित अनुभव वाली एक अंतरराष्ट्रीय विधिक कंपनी को इनफोर्समेंट से जुड़ी कार्यवाहियों के लिए जोड़ा गया है।

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