Cabinet Briefing : बैटरी स्टोरेज के लिए 18,100 करोड़ रुपये की PLI योजना को मंजूरी मिली, आएगा 45000 करोड़ का निवेश

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर P C : ANI

PLI Scheme for Battery Storage जावड़ेकर ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने बैटरी स्टोरेज के लिए 18100 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि इससे आने वाले कुछ सालों में 15000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।

Pawan JayaswalWed, 12 May 2021 03:15 PM (IST)

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। सरकार ने बैटरी स्टोरेज के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) की घोषणा कर दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। जावड़ेकर ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने बैटरी स्टोरेज के लिए 18,100 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि इससे आने वाले कुछ वर्षों में 15000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि इससे 45000 करोड़ रुपये का घरेलू व विदेशी निवेश आकर्षित होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'हम 20,000 करोड़ रुपये का बैटरी स्टोरेज उपकरण आयात करते हैं। पीएलआई योजना से अब हम इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे। देश में लंबे समय तक चलने वाली और जल्द चार्ज हो सके, ऐसी बैटरी की जरूरत है।  हमारे यहां यह बनती नहीं थी, इसलिए इसकी कमी है। भारत में 136000 मेगावाट सोलर विद्युत का उत्पादन हो रहा है, लेकिन उसका रात को उपयोग नहीं कर सकते। बैटरी स्टोरेज होगा, तो उसके आधार पर यह काम आसान होगा।'

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, 'कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रेलवे शिपिंग में बैटरी स्टोरेज से नई क्रांति आएगी। डीजल जनरेटर उद्योगों में बैकअप के रूप में काम आता है, बैटरी स्टोरेज इसका विकल्प बनेगा। बैटरी स्टोरेज से रूफ टॉप सोलर का उपयोग भी बढ़ेगा। इसका उपयोग जीवन के कई क्षेत्रों में होगा।' उन्होंने बताया कि यह इंसेंटिव बिक्री, ऊर्जा दक्षता, जीवन चक्र और स्थानीयकरण के आधार पर मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत में बैटरी स्टोरेज निर्माण में काम आने वाला कॉपर, बॉक्साइट भरपूर है, लेकिन इसका उपयोग नहीं हो रहा था। अब जब इसका उपयोग होगा, तो भारत में बनने वाला बैटरी स्टोरेज सस्ता भी पड़ेगा। इससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। देशी व विदेशी निवेश बढ़ेगा और लोगों को रोजगार मिलेगा। इलेक्ट्रिकल वाहनों का प्रयोग बढ़ने पर फ्यूल का उपयोग भी कम होगा, जिससे फ्यूल का आयात घटेगा।

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