BPCL की बिक्री में हो सकती है देरी, राजकोषीय घाटे की स्थिति बढ़ा सकती है सरकार की चिंताः सूत्र

(भारत पेट्रोलियम की मुंबई स्थित एक रिफाइनरी की फाइल फोटो) (PC: Reuters)
Publish Date:Fri, 25 Sep 2020 03:27 PM (IST) Author: Ankit Kumar

नई दिल्ली, रायटर्स। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के निजीकरण की सरकार की कोशिश अगले वित्त वर्ष तक खींच सकती है। सरकार के दस्तावेज एवं सूत्र इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं। कंपनी के प्रस्तावित निजीकरण में देरी से राजकोषीय घाटे को थामने की नई दिल्ली की कोशिश प्रभावित हो सकती है। बीपीसीएल सहित कई अन्य प्रमुख कंपनियों का निजीकरण सरकार के अहम लक्ष्यों में शामिल है। इससे सरकार को राजकोषीय घाटे को कम करने में मदद मिलेगी जो चालू वित्त वर्ष के पहले चार माह में ही बजट लक्ष्य के पार चली गई है। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने पिछले साल अनुमान लगाया था कि बीपीसीएल में सरकार अपनी 53.29 फीसद हिस्सेदारी बेचकर 8-10 अरब डॉलर जुटा सकती है। 

कोविड-19 की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था में पहली तिमाही में 23.9 फीसद का संकुचन देखने को मिला है। बीपीसीएल की बिक्री में देरी से वृद्धि को मजबूती देने के लिए प्रोत्साहन घोषित करने की सरकार की क्षमता प्रभावित हो सकती है।  

सरकार ने बीपीसीएल में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना के बारे में सबसे पहले नवंबर, 2019 में ऐलान किया था। यह दर्जनों सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की एक व्यापक योजना का हिस्सा है। 

इस बिक्री को चालू वित्त वर्ष के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कोरोना महामारी की वजह से लागू पाबंदियों की वजह से शुरुआती रुचि पत्र दाखिल करने की समयसीमा को दो माह के लिए आगे बढ़ाना पड़ा था। 

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पिछले महीने जारी सेल स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक इस महीने बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया का तीसरा चरण पूरा होगा। वहीं सरकारी विनिवेश से जुड़ी प्रक्रिया 25 चरण में पूरी होती है।  

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