फ्लैश सेल पर रोक सरकार का मकसद नहीं, जारी रहेगी ई-कॉमर्स प्लेटफॉ‌र्म्स पर डिस्काउंट सेल

e-commerce वर्चुअल प्रेसवार्ता में उपभोक्ता मामलों की अपर सचिव निधि खरे ने बताया कि प्रत्येक उत्पाद (प्रॉडक्ट) के आयात अथवा मैन्यूफैक्चरिंग की पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। ई-कॉमर्स कंपनियों को आयात के स्रोत की भी जानकारी देनी होगी।

Pawan JayaswalTue, 22 Jun 2021 08:14 PM (IST)
e-commerce ( P C : Pixabay )

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉ‌र्म्स की कारोबारी गतिविधियों या फ्लैश सेल पर रोक लगाने का कोई इरादा नहीं है। मंत्रालय के अनुसार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डिस्काउंट सेल जारी रहेगी। संशोधित मसौदे में सिर्फ यह प्रविधान शामिल किया गया है कि फ्लैश सेल की आड़ में ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी नहीं हो सके। फर्जी कंपनियों पर रोक लगाना भी इसका उद्देश्य है। लेकिन यह मसौदा अभी अंतिम नहीं है। मसौदे के प्रविधानों पर छह जुलाई तक आम लोगों की प्रतिक्रिया मांगी गई गई है।

सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ई-कॉमर्स में गडबडि़यों पर नियंत्रण पाने और उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया है। उसमें फ्लैश सेल और इस तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण का प्रविधान है। इस मसौदे के प्रविधानों पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक फ्लैश सेल की जांच नहीं कराई जाएगी। सिर्फ उन कंपनियों की जांच की जाएगी, जिनके खिलाफ शिकायत प्राप्त होगी।

वर्चुअल प्रेसवार्ता में उपभोक्ता मामलों की अपर सचिव निधि खरे ने बताया कि प्रत्येक उत्पाद (प्रॉडक्ट) के आयात अथवा मैन्यूफैक्चरिंग की पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। ई-कॉमर्स कंपनियों को आयात के स्रोत की भी जानकारी देनी होगी। सरकार ने जोर देकर कहा कि इस मसौदे को लेकर ई-कॉमर्स कंपनियों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

दरअसल, प्रस्तावित संशोधित मसौदे में फ्लैश सेल के नाम पर गड़बड़ी करने वालों पर रोक लगाने और उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुनने व उनके निवारण के लिए सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रविधान है। प्रस्तावित नियमों पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए सरकार ने इसे सार्वजनिक किया है।

खरे ने कहा कि हमारा मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण करना है। ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के व्यवसाय को उपभोक्ता मंत्रालय नियंत्रित नहीं करेगा। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) के दायरे में ही प्राप्त शिकायतों पर ही उपभोक्ता मंत्रालय कार्रवाई करेगा। उन्होंने बार-बार कहा कि सरकार डिस्काउंट सेल के खिलाफ नहीं है। निधि खरे सीसीपीए की चीफ कमिश्नर भी हैं।

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