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जून में 12.40 लाख करोड़ रुपये के ई-वे बिल हुए जारी, लॉकडाउन पूर्व की स्थिति की ओर तेजी से जाता दिख रहा है कारोबार

नई दिल्ली, पीटीआइ। देश में कारोबारी गतिविधियां तेजी से परवान चढ़ रही हैं। लॉकडाउन खुलने की शुरुआत के साथ ही वस्तुओं की आवाजाही में तेज उछाल आया है। जीएसटी नेटवर्क (GSTN) ने रविवार को एक बयान में कहा है कि इस वर्ष जून में कुल 4.27 करोड़ ई-वे बिल जारी हुए हैं। इनके माध्यम से 12.40 लाख करोड़ रुपये मूल्य से अधिक के सामानों की आवाजाही हुई है। इस दौरान रोजाना औसतन 14.26 लाख ई-वे बिल जारी हुए। यह आंकड़ा बताता है कि लॉकडाउन से पूर्व ई-वे बिल के माध्यम से जितना कारोबार हो रहा था, जून में उसका करीब 77 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर लिया गया है।

जीएसटीएन के मुताबिक इस वर्ष मार्च में चार करोड़ ई-वे बिल जारी हुए थे और उनके माध्यम से 11.43 लाख करोड़ रुपये मूल्य के सामानों की आवाजाही हुई थी। उसके मुकाबले जून का आंकड़ा ज्यादा है। हालांकि, लॉकडाउन की अवधि के दौरान अप्रैल में सिर्फ 84.53 लाख ई-वे बिल जारी हुए थे जिनकी कुल रकम 3.90 लाख करोड़ रुपये थी। इसी दौरान मई में 8.98 करोड़ रुपये मूल्य के ई-वे बिल जारी हुए थे। 

लॉकडाउन से पूर्व की अवधि में इस वर्ष जनवरी में जारी हुए ई-वे बिल की संख्या 5.61 करोड़ और उनकी कुल रकम 15.71 लाख करोड़ रुपये थी। इस वर्ष फरवरी में कारोबारियों और ट्रांसपोर्टर्स ने 5.63 करोड़ ई-वे बिल लिए और उन्होंने 15.39 लाख करोड़ रुपये मूल्य के माल की ढुलाई की।

जीएसटीएन के मुताबिक लॉकडाउन के पहले चरण यानी 25 मार्च से 14 अप्रैल के दौरान जारी हुए ई-वे बिल की संख्या में एकाएक बड़ी कमी आई और यह सिर्फ 1.72 लाख रह गया। हालांकि लॉकडाउन के दूसरे चरण (15 अप्रैल-03 मई) के दौरान इसमें सुधार आया और संख्या बढ़कर 3.51 लाख पर पहुंची। लॉकडाउन के तीसरे चरण (04-14 मई) के दौरान जारी हुए ई-वे बिल का आंकड़ा थोड़ा और सुधरकर 6.75 लाख और चौथे चरण (15-31 मई) में 9.84 लाख तक पहुंचा। 

जून में अनलॉक-1.0 के शुरू होते ही कारोबारी गतिविधियों में तेज उछाल दर्ज किया गया। गौरतलब है कि इस वर्ष जून में जीएसटी कलेक्शन भी बढ़कर 90.917 करोड़ रुपये रहा। इस वर्ष अप्रैल में यह आंकड़ा सिर्फ 32,294 करोड़ रुपये और मई में 62,009 करोड़ रुपये रहा था।

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